
गौरीशंकर गुप्ता/रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के विकासखंड घरघोड़ा अंतर्गत ग्राम कया के जंगल क्षेत्र में एक हाथी शावक की दुखद मृत्यु हो गई। सायंकाल स्थानीय ग्रामीणों ने सूचना दी कि आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 1310 में हाथी का बच्चा मृत अवस्था में पड़ा है। वन अमला तत्काल रवाना हुआ, लेकिन रात्रि का समय, दुर्गम पहाड़ी इलाका और आसपास विचरण कर रहे हाथी दल की मौजूदगी के कारण उसी वक्त पहुंचना संभव नहीं हो सका।
सुबह वन विभाग की टीम घटनास्थल पहुंची। प्रारंभिक जांच में नर शावक की उम्र एक वर्ष से कम पाई गई। पोस्टमार्टम के बाद ही मृत्यु का सटीक कारण स्पष्ट होगा।
घटना घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के चारमार बीट के कया गांव के जंगलों में घटी। ग्रामीणों के अनुसार, हाथी दल पहाड़ी से उतर रहा था जब शावक असंतुलित होकर ढलान पर फिसल गया और दो बड़ी चट्टानों के बीच दरार में फंस गया। गंभीर आंतरिक चोटें लगने से उसकी मौत हो गई। मादा हाथी और दल के सदस्य रात भर चिंघाड़ते रहे, जो उनकी पीड़ा दर्शाता है।
स्थानीय लोगों ने रात में असामान्य आवाजें सुनीं। हाथी दल ने शावक को निकालने का प्रयास भी किया, लेकिन असफल रहे। वन टीम ने शव को बाहर निकाला, मौके पर पोस्टमार्टम किया और दाह संस्कार कर दिया।
रायगढ़ वन मंडल के डीएफओ अरविंद ने बताया कि मौत ढलान वाले क्षेत्र में गिरने से लगी चोटों से हुई प्रतीत होती है। शव की स्थिति से अनुमान है कि घटना 2-3 दिन पुरानी थी। घरघोड़ा और तमनार रेंज के अधिकारी सक्रिय रहे। विस्तृत रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी।
जिले में पिछले तीन महीनों में हाथी शावकों की यह पांचवीं मौत है। वन विभाग ने दल पर निगरानी बढ़ा दी है। ग्रामीणों को जंगल प्रवेश न करने की सलाह दी गई।
रायगढ़ वन मंडल में दो हाथी दल विचरण कर रहे हैं—कुल 78 हाथी, जिसमें 22 नर, 40 मादा और 16 शावक शामिल हैं। यह क्षेत्र हाथियों का प्रमुख कॉरिडोर है, लेकिन दुर्गम पहाड़ियां शावकों के लिए घातक साबित हो रही हैं। मानवीय अतिक्रमण और जलवायु परिवर्तन से दल विचलित हो रहे हैं।
पिछले मामलों में भी शावक हादसों का शिकार हुए। प्रोजेक्ट एलीफेंट के तहत ट्रैकिंग मजबूत की जा रही है।
रायगढ़ छत्तीसगढ़ का वन संपदा बहुल जिला है। घरघोड़ा आदिवासी बहुल विकासखंड है, जहां ग्रामीण जंगलों पर आश्रित हैं। हाथी दल मानसून में फसलें नष्ट करते हैं, लेकिन संरक्षण प्राथमिकता है। स्थानीय विधायक और वन मंत्री ने संज्ञान लिया।
यह घटना मानव-वन्यजीव संघर्ष को उजागर करती है। ग्रामीण मुआवजा और सुरक्षा मांग रहे हैं।
शावकों की लगातार मौतें दल की संरचना प्रभावित कर रही हैं। ड्रोन निगरानी, रेडियो कॉलर और ग्रामीण जागरूकता आवश्यक है। केंद्र की हाथी आरक्षित क्षेत्र योजना रायगढ़ को लाभ देगी।



