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राजपुर में अधूरी सड़क को लेकर चक्काजाम के बाद प्रशासन झुका, एक सप्ताह में मरम्मत का आश्वासन

15 अगस्त विज्ञापन


नईदुनिया प्रतिनिधि,रायगढ़: लैलूंगा-बाकारुमा मुख्य मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर रविवार को ग्राम राजपुर में ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर फूट पड़ा। पूर्व भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष रवि भगत के नेतृत्व में ग्रामीणों ने चक्काजाम कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अधूरी सड़क का निर्माण शीघ्र शुरू कराने की मांग की। कई घंटों तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त किया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि बाकारुमा से लैलूंगा तक लगभग 23 किलोमीटर सड़क का निर्माण एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) परियोजना के तहत किया गया, लेकिन ग्राम राजपुर के करीब 600 मीटर हिस्से का निर्माण वर्षों से अधूरा पड़ा है। बरसात के दिनों में इस मार्ग से आवागमन करना बेहद कठिन हो जाता है। सड़क पर कीचड़ और गड्ढों के कारण आए दिन दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

आंदोलन के दौरान रवि भगत ने कहा

यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि आम जनता की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ा है। सड़क निर्माण में देरी से हजारों ग्रामीण प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल निर्माण कार्य शुरू कराने और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की।

भू-अर्जन विवाद बना निर्माण में बाधा

प्रशासन द्वारा आंदोलनकारियों को दिए गए लिखित जवाब में बताया गया कि बाकारुमा-लैलूंगा मार्ग का निर्माण एडीबी परियोजना के अंतर्गत कराया गया था। ग्राम राजपुर के 600 मीटर हिस्से में भू-अर्जन की राशि का भुगतान नहीं होने के कारण संबंधित भू-स्वामियों ने निर्माण कार्य नहीं होने दिया था, जिससे यह भाग अधूरा रह गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अब भू-अर्जन की राशि भू-अर्जन अधिकारी के खाते में जमा कर दी गई है और भूमि संबंधी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।

यहां यह बताया जाना लाजमी होगा कि उक्त मार्ग में कीचड़ एवं बड़े बड़े गढ्डे होने के चलते आये दिन दुर्घटना होती है, कीचड़ से फिसलन होनें बाइक सवार दुर्घटना का शिकार बन रहे है। मानो कीचड़ युक्त यह मार्ग किसी एडवेंचर स्पोर्ट है। जिसमें जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को राहगीर मजबूर हैं। बहरहाल अब यह देखना होगा कि उक्त सड़क निर्माण का आश्वासन मिलने के बाद कब तक सड़क निर्माण हो पाता है।

डीएमएफ मद से मिली 1.32 करोड़ की स्वीकृत

प्रशासन के अनुसार एडीबी मद में शेष 600 मीटर सड़क निर्माण के लिए राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण जिला प्रशासन ने जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद से 132.56 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। निर्माण एजेंसी के रूप में लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कार्य के लिए 21 मई को स्वीकृति जारी की जा चुकी है और वर्तमान में निविदा प्रक्रिया चल रही है।

जनता के दबाव के आगे देना पड़ा जवाब, सात दिन में मरम्मत का दावा राजपुर में हुए चक्काजाम ने एक बार फिर दिखाया कि लंबे समय से लंबित जनहित के मुद्दे पर जब जनता एकजुट होती है तो प्रशासन को जवाब देना पड़ता है। वर्षों से अधूरी पड़ी सड़क को लेकर लगातार शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं निकल पाया था, लेकिन आंदोलन के बाद प्रशासन ने पहली बार लिखित रूप से समयसीमा और निर्माण की स्थिति स्पष्ट की है।

प्रशासन ने अपने जवाब में कहा है कि वर्तमान में आवागमन की समस्या को देखते हुए यदि स्थल निर्विवाद रूप से उपलब्ध हो जाता है तो आगामी एक सप्ताह के भीतर मार्ग की मरम्मत का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

बरसात में सबसे अधिक परेशानी

राजपुर का अधूरा 600 मीटर हिस्सा बरसात में ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन जाता है। कीचड़, जलभराव और गड्ढों के कारण स्कूल जाने वाले बच्चे, मरीज और रोजाना आवागमन करने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द निर्माण शुरू नहीं हुआ तो फिर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। वहीं उक्त सड़क से रायगढ़ होकर पत्थलगांव अधिकांश वाहन आवागमन करती है और अंबिकापुर तथा जशपुर के लिए आगे बढ़ती है।

एकजुटता के लिए पिकअप से आह्वान, फिर भी भीड़ रही नदारद

आंदोलन को सफल बनाने और अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए आयोजकों ने पिकअप वाहन में माइक लगाकर गांव-गांव जनसंपर्क किया। चुनाव प्रचार की तर्ज पर लोगों से चक्काजाम में शामिल होने और सड़क निर्माण के समर्थन में एकजुट होने की अपील की गई। इसके बावजूद आंदोलन स्थल पर अपेक्षित जनसमर्थन नहीं दिखा। बड़ी भीड़ जुटने के दावों के विपरीत सीमित संख्या में ही लोग पहुंचे, जिससे आंदोलन की जनभागीदारी चर्चा का विषय बनी रही।



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