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Owaisi vs RSS: भारतीयों के पारिवारिक जीवन में दखल देने वाले भागवत कौन? ‘तीन बच्चे’ वाले बयान पर ओवैसी ने पूछा

15 अगस्त विज्ञापन


तीन बच्चों वाले बयान को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि मोहन भागवत भारतीयों के पारिवारिक जीवन में दखल देने वाले कौन होते हैं? उन्होंने कहा कि ऐसी घोषणाएं महिलाओं पर अनावश्यक बोझ डालेंगी। 

दरअसल, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक दंपती के तीन बच्चे होने की वकालत की थी। साथ ही कहा था कि जिस समाज में परिवारों के तीन से कम संतानें हों, उनका अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। उन्होंने आबादी नियंत्रण के साथ पर्याप्त जनसंख्या को भी देश के लिए जरूरी बताया था।

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मुस्लिम आबादी हिंदुओं से आगे निकलने का फैलाया झूठ

संघ प्रमुख के इस बयान को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी ने उन पर निशाना साधा। ओवैसी ने कहा कि संघ प्रमुख के अनुसार, अब भारतीय महिलाओं को तीन बच्चे पैदा करने चाहिए। उन्होंने पूछा कि संघ प्रमुख ने मुस्लिम समुदाय को दोष क्यों दिया? ओवैसी ने कहा कि वर्षों से भाजपा और आरएसएस कहते रहे हैं कि मुस्लिम आबादी हिंदुओं से आगे निकल जाएगी। उन्होंने यह झूठ फैलाया है। अब वह कह रहे हैं कि हर महिला को तीन बच्चे पैदा करने चाहिए। आखिर मोहन भागवत कौन होते हैं भारतीयों के पारिवारिक मामलों में दखल देने वाले? ऐसा कहना महिलाओं पर अनावश्यक बोझ डालना है। 

 

बढ़ती जनसंख्या को ओवैसी ने बताया बड़ी चुनौती

ओवैसी ने बढ़ती जनसंख्या को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने पूछा कि वे इस बारे में बात क्यों नहीं करते कि भारत के पास दुनिया में सबसे युवा आबादी है, जो हमारी बड़ी ताकत है। लेकिन आप उन्हें रोजगार नहीं दे पा रहे, और न ही उनके लिए अच्छी शिक्षा की व्यवस्था कर पा रहे हैं।

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भाजपा-आरएसएस के निशाने पर है संभल

ओवैसी ने संभल हिंसा को लेकर भी बात की। उन्होंने संभल हिंसा पर न्यायिक पैनल द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने पर कहा, ‘मैंने रिपोर्ट नहीं पढ़ी है। संभल भाजपा-आरएसएस के निशाने पर है। न्याय की लड़ाई लड़ी जा रही है। हमें न्यायालय से उम्मीद है। हमें भाजपा, योगी और नरेंद्र मोदी से न्याय की कोई उम्मीद नहीं है।’

 

देश कानून-संविधान से चलता है, गीता-कुरान से नहीं: रशीदी

संघ प्रमुख के बयान पर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने भी उन पर निशाना साधा। रशीदी ने कहा, ‘यह देश कानून, संविधान से चलता है। गीता या कुरान से नहीं। इसलिए, मोहन भागवत का बार-बार यह कहना कि यह एक हिंदू राष्ट्र है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता, अन्य सभी धर्मों का अपमान है। वह कभी-कभी कॉमन सिविल कोड की भी बात करते हैं। अगर कॉमन सिविल कोड का मतलब सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि कानून सबके लिए समान हो, तो यह वास्तव में सबके लिए समान है। अगर आप चाहते हैं कि मुसलमानों, सिखों और बौद्धों के पर्सनल लॉ खत्म हो जाएं, तो हम ऐसे कॉमन सिविल कोड को स्वीकार नहीं करते…हम इसकी निंदा करते हैं।’





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