नगीना विश्वकर्मा और त्रिवेणी ने कला से बनाया खास मुकाम: कोंडागांव की दो बेटियों को राज्य स्तरीय सम्मान, संघर्ष, कला और पहचान – Kondagaon News

कोंडागांव की मिट्टी में कला बसती है और इसी मिट्टी से निकली दो बेटियों ने अब अपनी मेहनत और हुनर से राज्य स्तर पर पहचान बना ली है। वर्ष 2024-25 के राज्य स्तरीय हस्तशिल्प सम्मान के लिए जिले की नगीना विश्वकर्मा और त्रिवेणी का चयन हुआ है। पांच शिल्पियों की सूची में कोंडागांव की इन दो महिलाओं का नाम आना, जिले के लिए गर्व की बात है। नगीना को लौह शिल्प के लिए, जबकि त्रिवेणी को बेल मेटल कला के लिए यह सम्मान मिलेगा। पहली कहानी नगीना विश्वकर्मा की कहानी सिर्फ एक कलाकार की नहीं, बल्कि एक बेटी के समर्पण की भी है। उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता तातीराम विश्वकर्मा को श्रद्धांजलि देने के लिए जो प्रतिमा बनाई, उसी ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। बचपन से पिता के साथ काम करते-करते उन्होंने लौह शिल्प की बारीकियां सीखी। चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कला से अपनी अलग पहचान बना ली। दूसरी कहानी वहीं, फरसगांव की त्रिवेणी भी अपनी परंपरागत बेल मेटल कला को आगे बढ़ा रही हैं। त्रिवेणी ने अपनी मेहनत और लगन से इस कला को न सिर्फ जिंदा रखा, बल्कि उसे नई पहचान भी दिलाई। राज्य शासन हर वर्ष हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न विधाओं जैसे बेलमेटल, लौह, मृदा, काष्ठ और पाषाण शिल्प में यह सम्मान प्रदान करता है। कोंडागांव की कला की पहचान विदेश तक हस्तशिल्प विभाग का कहना है कि कोंडागांव की कला देश ही नहीं, विदेशों तक पहचान बना चुकी है। अब इस क्षेत्र में महिलाएं भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं और अपनी काबिलियत से नई मिसाल पेश कर रही हैं। नगीना और त्रिवेणी की यह सफलता सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उस बदलते दौर की कहानी है, जहां गांव की बेटियां अपने हुनर से दुनिया में अपनी जगह बना रही
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