छत्तीसगढ़ के मनमोहक जलप्रपात: बलौदाबाजार में मानसून पर्यटन को सुरक्षा का ग्रहण, हादसे का खतरा बरकरार
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में मानसून की झमाझम बारिश से स्थानीय जलप्रपात जीवंत हो उठे हैं, जो पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। हालांकि, इन मनोरम स्थलों पर सुरक्षा के अभाव में जोखिम बढ़ता जा रहा है। चेतावनी बोर्ड और सुरक्षाकर्मियों की गैरमौजूदगी में अतिउत्साही युवा जानलेवा जोखिम उठा रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है। स्थानीय नागरिक प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांग कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में मानसून की मूसलाधार बारिश ने प्राकृतिक सुंदरता को नया आयाम दिया है। बीते कुछ दिनों से जारी झमाझम फुहारों ने स्थानीय बरसाती जलप्रपातों में मानो जान फूंक दी है, जिससे ये स्थल अपने पूरे उफान पर हैं और पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। जुलाई के दूसरे सप्ताह से शुरू हुई इन बारिशों ने जिले के सीमित, मगर अनूठे जलप्रपातों को फिर से जीवंत कर दिया है, जो स्थानीय पर्यटकों और युवाओं को बरबस अपनी ओर खींच रहे हैं। हालांकि, इस मनोरम मौसम के साथ ही सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चिंता भी उभरकर सामने आई है, जहां प्रशासनिक उदासीनता बड़े हादसों को न्योता दे रही है।
इन प्रमुख पर्यटन और जलप्रपात स्थलों पर सुरक्षा के कोई माकूल इंतजाम नहीं किए गए हैं। वन विभाग और पुलिस प्रशासन की ओर से न तो चेतावनी या सुरक्षा बोर्ड लगाए गए हैं और न ही सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। इस अनदेखी का परिणाम यह है कि अतिउत्साही युवा जोखिम भरी हरकतें कर रहे हैं, वहीं असामाजिक तत्वों के जमावड़े से यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सुरक्षा का यह अभाव इन प्राकृतिक सौंदर्य स्थलों को डेंजर पॉइंट में तब्दील कर रहा है।
मानसून के दौरान जलप्रपातों के आसपास फिसलन काफी बढ़ गई है, जिससे जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। विशेषकर सिद्धखोल और धसकुंड जैसे लोकप्रिय स्थलों पर स्थिति अधिक गंभीर है। यहां अतिउत्साही युवक तेज बहाव के बीच भी पानी को पार कर रहे हैं और मोबाइल से सेल्फी लेने या नहाने के चक्कर में झरने के मुख्य डेंजर पॉइंट तक पहुंच जाते हैं। जरा सी चूक या एक गलत कदम किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है, जिसकी भयावहता का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।
स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों ने प्रशासन से तुरंत सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने की मांग की है। उनकी अपील है कि मानसून के दौरान वन विभाग और पुलिस प्रशासन इन स्थलों पर अनिवार्य रूप से चेतावनी बोर्ड लगाए, नियमित गश्त सुनिश्चित करे और सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी लगाए। ऐसा करने से न केवल संभावित हादसों को रोका जा सकेगा, बल्कि असामाजिक तत्वों पर भी नकेल कसी जा सकेगी, जिससे परिवार के साथ आने वाले पर्यटक सुरक्षित महसूस कर सकेंगे।
जिले के प्रमुख आकर्षक जलप्रपातों में पलारी-सिरपुर मार्ग पर स्थित लगभग 45 फीट ऊंचा धसकुंड जलप्रपात, कसडोल से 10 किलोमीटर दूर प्रसिद्ध सिद्धखोल जलप्रपात (जहां सिद्धबाबा मंदिर और शेर गुफा भी है), कसडोल-पिथौरा मार्ग पर आमाझरिया जलप्रपात और बोरसी गांव के पास कूटन नाला जलप्रपात शामिल हैं। ये सभी स्थल अपनी अनूठी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और पहाड़ों से घिरे परिवेश के लिए जाने जाते हैं। इन्हें सही ढंग से विकसित और सुरक्षित किया जाए, तो ये छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर अपनी खास पहचान बना सकते हैं।