
अंबिकापुर, 19 दिसंबर 2025: नेशनल हेराल्ड प्रकरण में दिल्ली की विशेष अदालत से मिली राहत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश का दौर शुरू हो गया है। पार्टी ने फैसले को “सत्य की जीत” बताते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया। इसी उत्साह में जिला कांग्रेस कमेटी सरगुजा ने गुरुवार को भाजपा कार्यालय पर जोरदार हल्लाबोल किया। बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता रैली के रूप में पहुंचे और केंद्र सरकार के खिलाफ तीखे नारे लगाते हुए अपना आक्रोश जाहिर किया। यह प्रदर्शन सरगुजा संभाग में कांग्रेस की राजनीतिक सक्रियता को दर्शाता है, जहां आदिवासी वोटबैंक को मजबूत करने की होड़ लगी हुई है।
नेशनल हेराल्ड केस
नेशनल हेराल्ड मामला 2011 से चला आ रहा विवादास्पद प्रकरण है, जिसमें भाजपा ने कांग्रेस पर अखबार की संपत्तियों में 2000 करोड़ के कथित घोटाले का आरोप लगाया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य नेताओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस चलाया। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 18 दिसंबर को ईडी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि एजेंसी के पास ठोस सबूत नहीं हैं और यह राजनीतिक प्रतिशोध का केस लगता है। अदालत ने जांच को आगे बढ़ाने की अनुमति दी, लेकिन तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
कांग्रेस ने इसे ऐतिहासिक जीत बताया। राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “यह मोदी सरकार की साजिशों का पर्दाफाश है। ईडी-सीबीआई को विपक्ष को फंसाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।” राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “सत्य हमेशा जीतता है।” छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने इसे स्थानीय स्तर पर भुनाया। प्रदेश अध्यक्ष कमल बंशीवाल ने कहा, “यह फैसला पूरे देश के लिए संदेश है। हम सरगुजा से शुरुआत कर रहे हैं।”
सरगुजा प्रदर्शन का पूरा विवरण
गुरुवार सुबह 10:30 बजे अंबिकापुर के राजीव भवन से रैली शुरू हुई। जिला कांग्रेस अध्यक्ष रमेश सिंह पोर्ते के नेतृत्व में 600 से अधिक कार्यकर्ता, महिलाएं, युवा और आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए। रैली भाजपा कार्यालय पहुंची, जहां “मोदी इस्तीफा दो”, “ईडी की साजिश बंद करो”, “गांधी परिवार जिंदाबाद” जैसे नारे गूंजे। प्रदर्शनकारियों ने प्लेकार्ड लहराए, जिनमें “राजनीतिक बदला लेना बंद करो” और “संस्थाओं का दुरुपयोग मत करो” लिखा था। हल्लाबोल करीब ढाई घंटे चला। पुलिस ने भारी सुरक्षा बल तैनात किया, लेकिन स्थिति शांतिपूर्ण रही।
रमेश सिंह पोर्ते ने मंच से कहा, “नेशनल हेराल्ड में कोई घोटाला नहीं था। भाजपा ने गांधी परिवार को फंसाने की कोशिश की, लेकिन अदालत ने सच्चाई सामने ला दी। सरगुजा के आदिवासी भाइयों-बहनों, हम आपके साथ हैं।” पूर्व विधायक जयंत साहू ने केंद्र की नक्सल नीतियों पर निशाना साधा। महिला कांग्रेस की मीना मरकाम ने महिलाओं के खिलाफ एजेंसी दुरुपयोग का उदाहरण दिया। आदिवासी कार्यकर्ता रामू रामटेके ने कहा, “सरगुजा में कोयला लूट हो रही है, केंद्र चुप है। यह प्रदर्शन हमारी लड़ाई है।”
भाजपा ने प्रदर्शन को “नौटंकी” करार दिया। प्रदेश प्रवक्ता ताम्रध्वज साहू ने कहा, “केस खत्म नहीं हुआ, केवल एक याचिका खारिज हुई। कांग्रेस भ्रष्टाचार छुपा रही है। 2000 करोड़ का हिसाब दो।” भाजपा ने इसे वोटबैंक की राजनीति बताया। जिला भाजपा अध्यक्ष ने कहा, “सरगुजा में विकास कार्य हो रहे हैं, कांग्रेस हल्ला मात्र कर रही है।” आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों का समर्थन किया, लेकिन तटस्थ रही।
छत्तीसगढ़ में यह प्रदर्शन 2028 चुनावों से पहले माहौल बनाने वाला है। सरगुजा में कांग्रेस का पारंपरिक आधार है, लेकिन 2023 में भाजपा ने जीत हासिल की। कांग्रेस मीडिया प्रमुख अनुपम फिलिप ने कहा, “हम 20 जिलों में ऐसे प्रदर्शन करेंगे। जनता भाजपा की तानाशाही देख रही है।” विशेषज्ञों का मानना है कि नेशनल हेराल्ड कांग्रेस को नैतिक बल देगा।
सरगुजा आदिवासी बहुल संभाग है, जहां 32% एसटी आबादी है। नक्सलवाद, वन अधिकार, कोयला खनन और बेरोजगारी प्रमुख मुद्दे हैं। कांग्रेस ने प्रदर्शन में इन्हें जोड़ा। कार्यकर्ताओं ने कहा कि केंद्र की नीतियां आदिवासियों को नुकसान पहुंचा रही हैं। भाजपा की हिंदुत्व रणनीति ने यहां सेंध लगाई, लेकिन कांग्रेस गांधी परिवार के नाम पर एकजुट हो रही है। प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान शुरू किया।
यह हल्लाबोल कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी राष्ट्रीय मुद्दों को स्थानीय बनाकर वोटबैंक मजबूत करेगी। भाजपा को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ेगी। आने वाले दिनों में बिलासपुर, दुर्ग जैसे जिलों में प्रदर्शन होंगे। नेशनल हेराल्ड केस लंबा चलेगा, लेकिन वर्तमान राहत ने कांग्रेस को सांस दी है। सरगुजा प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि स्थानीय स्तर पर भी पार्टी जागरूक है। जैसा कि पोर्ते ने कहा, “यह हल्लाबोल सत्य की आवाज है।”




