छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खरीफ-2026 एवं संभावित अल्प वर्षा की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की

15 अगस्त विज्ञापन

अल्प वर्षा की हर चुनौती से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता, जल संरक्षण, वैज्ञानिक खेती और ग्रामीण रोजगार पर विशेष जोर

वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से जल सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

छत्तीसगढ़ को 46 हजार टन से अधिक डीएपी (DAP) की आपूर्ति प्राप्त

रायपुर:  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में खरीफ सीजन-2026 के दौरान संभावित अल्प वर्षा की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग तथा विकसित भारत-बीवी-जी राम जी योजना की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में मौसम की संभावित स्थिति, खाद एवं बीज की उपलब्धता, जल संरक्षण, सिंचाई प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती तथा ग्रामीण रोजगार से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसानों के हित सर्वोपरि हैं और किसी भी परिस्थिति में उन्हें खाद, बीज, तकनीकी मार्गदर्शन अथवा आवश्यक संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करते हुए प्रत्येक जिले के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्ययोजना तैयार रखें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा से उन्होंने छत्तीसगढ़ के किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त डीएपी उर्वरक उपलब्ध कराने का आग्रह किया था। इसके सकारात्मक परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ को 46 हजार टन से अधिक डीएपी (DAP) की आपूर्ति प्राप्त हुई है, जो सामान्य से अधिक है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होगा तथा खरीफ सीजन की तैयारियों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि धान की फसल के लिए आवश्यक सिंचाई जल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में जल स्रोतों का वैज्ञानिक प्रबंधन किया जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

उन्होंने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों, डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर), कतार पद्धति से बुवाई, बीज उपचार, नमी संरक्षण तथा वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों के प्रति व्यापक रूप से जागरूक किया जाए। साथ ही उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, जिससे किसानों को बेहतर आय के अवसर प्राप्त हों और कृषि जोखिम कम हो।

मुख्यमंत्री श्री साय ने किसानों से अपील की कि वे कृषि संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या अथवा तकनीकी सलाह के लिए कृषि महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, अनुसंधान संस्थानों तथा कृषि विभाग के विशेषज्ञों से संपर्क करें और वैज्ञानिक खेती को अपनाएं। उन्होंने अमानक बीज एवं उर्वरकों की बिक्री तथा कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में बताया गया कि राज्य में खाद एवं बीज का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा सभी जिलों में समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। बैठक में बताया गया कि अर्ली वेरायटी के धान बीज बीज निगम के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराने की संपूर्ण तैयारी पूरी कर ली गई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संभावित अल्प वर्षा जैसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जल संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाया जाएगा। उन्होंने ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए वर्षा जल संरक्षण, खेत तालाब, जल संरचनाओं के निर्माण तथा भूजल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक आपदाओं से किसानों की सुरक्षा के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा विकसित ‘सचेत’, ‘दामिनी’ और ‘मेघदूत’ मोबाइल एप का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि समय पर मौसम संबंधी जानकारी किसानों तक पहुंच सके। साथ ही सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को उचित दर पर खरपतवारनाशक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिससे उत्पादन लागत कम हो और फसल सुरक्षित रह सके।

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