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महा-खुलासा: घरघोड़ा में ‘राखड़ माफिया’ का नंगा नाच, सिस्टम की आँखों पर चढ़ी भ्रष्टाचार की ‘सफेद परत’

महा-खुलासा: घरघोड़ा में 'राखड़ माफिया' का नंगा नाच, सिस्टम की आँखों पर चढ़ी भ्रष्टाचार की 'सफेद परत'

15 अगस्त विज्ञापन

गौरीशंकर गुप्ता /रायगढ़ : औद्योगिक विकास की आड़ में घरघोड़ा क्षेत्र को राख के ढेर में तब्दील करने की साजिश अब बेनकाब हो चुकी है। रातों-रात सड़कों, खेतों और नदी-नालों में फेंकी जा रही फ्लाई ऐश ने न केवल पर्यावरण का दम घोंट दिया है, बल्कि ‘अवैध वसूली और शॉर्टकट’ के इस खेल ने नियमों का पालन करने वाले वैध ट्रांसपोर्टरों को भी भुखमरी की कगार पर ला खड़ा किया है।

मौत का डस्टबिन बना घरघोड़ा :

प्रशासन आखिर किसका इंतजार कर रहा है? -​जिले का खनिज और पर्यावरण विभाग क्या कुंभकर्णी नींद सो रहा है? हर रात सैकड़ों गाड़ियां बिना तिरपाल के, हवा में जहर घोलते हुए सड़कों पर दौड़ रही हैं। घरघोड़ा के रिहायशी इलाकों और जंगलों में अवैध डंपिंग बेधड़क जारी है। स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या इन माफियाओं को किसी ‘बड़े हाथ’ का संरक्षण प्राप्त है?

वैध ट्रांसपोर्टर :

ईमानदारी की सजा या सिस्टम का जुल्म? -​सबसे बड़ा सवाल उन वैध ट्रांसपोर्टरों का है जो सरकार को टैक्स देते हैं और सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं।

* ​अवैध खेल: माफिया कम रेट पर काम पकड़ते हैं क्योंकि उन्हें डंपिंग यार्ड का खर्च नहीं देना पड़ता।
* ​वैध का नुकसान: नियमों पर चलने वाले ट्रांसपोर्टरों को काम मिलना बंद हो गया है।
* ​भ्रष्टाचार की चेन: “बिना कागजों के राख कहीं भी गिरा दो” वाली मानसिकता ने पूरे ट्रांसपोर्ट बिजनेस को प्रदूषित कर दिया है।

पर्यावरण की ‘भस्म’ से किसका घर भर रहा है? -​पावर प्लांटों से निकलने वाली यह राख कोई कचरा नहीं, बल्कि एक साइलेंट किलर है।

​तल्ख सवाल :

आखिर क्यों उन बड़े उद्योगों पर कार्यवाही नहीं होती जिनके गेट से ये गाड़ियां बिना चेक-लिस्ट के बाहर निकलती हैं? क्या जिला प्रशासन के पास इतनी फुर्सत नहीं कि वे रात के अंधेरे में होने वाले इस ‘काले कारोबार’ की सुध ले सकें?

​प्रमुख मांगें :

जो अब जन-आंदोलन की आवाज बन रही हैं

* ​अवैध डंपिंग स्पॉट की तत्काल जांच: जहाँ राख गिराई गई है, वहाँ से मिट्टी के सैंपल लिए जाएं और दोषियों पर FIR हो।
* ​ब्लैकलिस्टिंग: अवैध रूप से राख परिवहन करने वाली गाड़ियों और उन प्लांटों को तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए।
* ​रात में ड्रोन निगरानी: फ्लाई ऐश रूट पर विशेष निगरानी दल तैनात किए जाएं।

 

 

​प्रशासन की चुप्पी अब ‘सहमति’ मानी जा रही है। यदि जल्द ही इन अवैध ट्रांसपोर्टरों और स्थानीय राखड़ माफियाओं के खिलाफ बुलडोजर जैसी कार्यवाही नहीं हुई, तो घरघोड़ा की जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।

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