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मीडिया की खबर से हड़कंप: लैलूंगा में अवैध आधार सेंटर पर प्रशासन का हथौड़ा, तहसीलदार ने 24 घंटे में सील किया

मीडिया की खबर से हड़कंप: लैलूंगा में अवैध आधार सेंटर पर प्रशासन का हथौड़ा, तहसीलदार ने 24 घंटे में सील किया

15 अगस्त विज्ञापन

गौरीशंकर गुप्ता/लैलूंगा। आधार कार्ड के नाम पर ग्रामीणों की जेब पर डाका डालने वाले एक अवैध सेंटर का अंत आखिरकार प्रशासन के ‘हथौड़े’ से हो गया। तहसीलदार शिवम पांडे ने स्थानीय मीडिया की खबरों और ग्रामीणों के भारी आक्रोश का संज्ञान लेते हुए महज 24 घंटे के अंदर ताबड़तोड़ कार्रवाई को अंजाम दिया। निजी भवन में संचालित इस ‘वसूली की दुकान’ को सील कर दिया गया, जिससे क्षेत्र के भ्रष्ट संचालकों में हड़कंप मच गया है।

यह कार्रवाई लैलूंगा तहसील के एक व्यस्त इलाके में स्थित सेंटर पर हुई, जहाँ पिछले कई महीनों से आधार कार्ड बनवाने और अपडेट कराने के नाम पर लोगों से मनमाने ढंग से पैसे वसूले जा रहे थे। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सेंटर के संचालक नियमों को ठेंगा दिखाते हुए आधार कार्ड के लिए 200 से 500 रुपये तक ले रहे थे, जबकि सरकारी नियमों के तहत यह सेवा मुफ्त है। खासकर गरीब आदिवासी परिवार, जो सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड पर निर्भर हैं, इस लूट के प्रमुख शिकार बने। एक ग्रामीण रमेश साहू ने बताया, “हमारे जैसे मजदूरों के पास आधार कार्ड नहीं तो राशन कार्ड का लाभ नहीं मिलता। ये लोग 300 रुपये मांगते थे, और कई बार कार्ड भी गायब हो जाता।”

मीडिया की भूमिका इस कार्रवाई में निर्णायक साबित हुई। स्थानीय हिंदी समाचार पोर्टलों और सोशल मीडिया पर ग्रामीणों ने वीडियो और फोटो शेयर कर शिकायतें दर्ज कीं। एक प्रमुख न्यूज़ चैनल ने कल ही इस अवैध सेंटर की पोल खोल दी, जिसमें संचालकों के वसूली के वीडियो वायरल हो गए। तहसीलदार शिवम पांडे ने खबर पढ़ते ही संज्ञान लिया और टीम गठित कर सत्यापन शुरू कर दिया। “मीडिया और जनता की आवाज प्रशासन के लिए सबसे बड़ा संकेत है। हमने तुरंत छापा मारा और सेंटर को सील कर दिया,” पांडे ने कार्रवाई के बाद बताया।

कार्रवाई सुबह 10 बजे शुरू हुई। तहसीलदार पांडे के नेतृत्व में राजस्व निरीक्षक, पुलिस बल और आधार विभाग के अधिकारी मौके पर पहुँचे। सेंटर संचालक एक निजी किराए के भवन में आधार मशीनें और फर्जी दस्तावेज़ चला रहे थे। छापे में 5 आधार एनरोलमेंट किट, दर्जनों फर्जी रसीदें, 25 हजार रुपये नकद और कई आधार कार्ड मिले। संचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें खुलासा हुआ कि यह सेंटर पिछले 8 महीनों से फर्जी UIDAI लाइसेंस के नाम पर चल रहा था। भवन मालिक को भी नोटिस जारी कर दिया गया है।

 जिले में सरकारी आधार सेंटर कम होने से लोग निजी सेंटरों पर निर्भर हो जाते हैं, जहाँ भ्रष्टाचार पनपता है। लैलूंगा जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी इस समस्या को और बढ़ाती है। स्थानीय विधायक रामचंद्र सिंह ने इसकी निंदा करते हुए कहा, “प्रशासन की यह सर्जिकल स्ट्राइक सराहनीय है। लेकिन अब स्थायी समाधान के लिए हर पंचायत में आधार केंद्र खोलने की जरूरत है।”

ग्रामीणों में खुशी की लहर है। कई लोगों ने तहसीलदार पांडे को धन्यवाद दिया। एक बुजुर्ग महिला लक्ष्मी बाई बोलीं, “अब बेटा मुफ्त आधार बनवा सकेगा। ये लोग हमारी मजबूरी का फायदा उठा रहे थे।” ऐसी कार्रवाइयाँ नियमित होनी चाहिए। UIDAI के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि जिले में अब ऑनलाइन शिकायत पोर्टल सक्रिय किया जाएगा, जहाँ लोग सीधे रिपोर्ट कर सकेंगे।

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