माओवादी संगठन से जुड़े चार आरोपितों को बिलासपुर की विशेष एनआईए कोर्ट से मिली जमानत

पुलिस का आरोप है कि इन आरोपितों ने प्रतिबंधित भाकपा संगठन के लिए शहरी नेटवर्क तैयार करने, सूचनाओं के आदान-प्रदान और अन्य सहयोगात्मक गतिविधियों में भूम …और पढ़ें
HighLights
- 56 गवाहों में अब तक तीन के बयान दर्ज।
- सह-आरोपित को पहले मिल चुकी है राहत।
- थाने में दर्ज यूएपीए और बीएनएस केस।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। बिलासपुर स्थित विशेष एनआइए न्यायालय ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार चार आरोपितों को जमानत दे दी है। विशेष न्यायाधीश एनआइए एक्ट सिराजुद्दीन कुरैशी की अदालत ने गिरधर नाग, सुकारू राम कोरसा, संदेव पोड़यामी और शंकर कोरसा की जमानत याचिकाएं स्वीकार करते हुए उन्हें सशर्त रिहा करने का आदेश दिया।
यह मामला रायपुर के डीडी नगर थाना में दर्ज अपराध से संबंधित है। आरोपितों के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 147, 148, 61 तथा गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम की धाराओं 17, 18, 19, 20, 38, 39 और 40 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
पुलिस का आरोप है कि इन आरोपितों ने प्रतिबंधित भाकपा संगठन के लिए शहरी नेटवर्क तैयार करने, सूचनाओं के आदान-प्रदान और अन्य सहयोगात्मक गतिविधियों में भूमिका निभाई।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि सभी आरोपितों का कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है और वे समाज में स्थायी रूप से स्थापित व्यक्ति हैं। अदालत ने पाया कि गिरधर नाग के कब्जे से केवल एक मोबाइल फोन जब्त किया गया था, जबकि अन्य आरोपितों के पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।
ट्रायल जल्द खत्म होने की संभावना नहीं
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि मामले में सह-आरोपित धनसिंह गावड़े को पूर्व में जमानत मिल चुकी है। अदालत ने जमानत मंजूर करते हुए कहा कि आरोपित लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं और ट्रायल के शीघ्र समाप्त होने की संभावना नहीं है। जमानत की शर्तों में प्रत्येक आरोपित को 20 हजार रुपये का निजी बंधपत्र और समान राशि का जमानती प्रस्तुत करना होगा।




