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मंत्री बोले-पढ़े-लिखे होते तो लखमा की यह स्थिति न होती: मनेंद्रगढ़ में शाला प्रवेश उत्सव में श्याम बिहारी जायसवाल ने शिक्षा पर दिया जोर – Manendragarh-Chirmiri-Bharatpur News

15 अगस्त विज्ञापन


मनेंद्रगढ़ में शाला प्रवेश उत्सव में मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

मनेंद्रगढ़ के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय में आयोजित जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव के अवसर पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने शिक्षा की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि आज के दौर में पढ़ाई केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि ज

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छात्राओं का हुआ सम्मान

कार्यक्रम की शुरुआत नवप्रवेशी बच्चों के तिलक और माल्यार्पण से हुई, उन्हें पुस्तकें और स्कूल बैग भी भेंट किए गए। इस मौके पर जिले की दो प्रतिभाशाली छात्राओं वंदना सिंह और श्रुति मंगतानी को सम्मानित किया गया। वंदना सिंह ने जनकपुर के नौडिया गांव से रोज़ाना 10 किलोमीटर साइकिल चलाकर स्कूल जाती थी और 10वीं बोर्ड परीक्षा में प्रदेश में 10वां स्थान हासिल किया। वहीं श्रुति मंगतानी ने प्रदेश स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया। मंत्री जायसवाल ने दोनों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया और उनके प्रयासों की सराहना की।

शिक्षकों की कमी पर युक्तियुक्तकरण का समाधान

मंत्री ने बताया कि जिले में तीन ऐसे स्कूल थे, जहां एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं थे और 129 स्कूलों में केवल एक-एक शिक्षक कार्यरत थे। ऐसी स्थिति में बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। इसलिए सरकार ने “युक्तियुक्तकरण” के तहत एक स्कूल में दो से तीन शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा, “हम 2047 के विज़न के साथ आगे बढ़ रहे हैं। एआई के युग में लचर शिक्षा व्यवस्था से लक्ष्य प्राप्त नहीं हो सकते। इसलिए शिक्षकों और छात्रों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना होगा।”

पढ़ाई न होने के नुकसान पर बोले मंत्री – लखमा की स्थिति शायद नहीं बनती

कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या चुनाव आयोग को प्रत्याशियों के लिए साक्षर होना अनिवार्य करना चाहिए, तो मंत्री जायसवाल ने कहा, आज टेक्नोलॉजी का युग है। पहले कंप्यूटर था, अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आ गया है। समय के साथ बदलाव जरूरी है। चाहे वह व्यापारी हो, नेता हो या किसान – सभी को पढ़ा-लिखा होना चाहिए।

इसी संदर्भ में जब पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के उस बयान पर सवाल किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसलिए उनसे दस्तखत करवा लिए गए, तो मंत्री जायसवाल ने साफ कहा, अगर वे पढ़े-लिखे होते, तो शायद आज ऐसी स्थिति निर्मित नहीं होती।

शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर सरकार का फोकस

मंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत हमेशा से शिक्षा का केंद्र रहा है, चाहे तक्षशिला हो या नालंदा। “आज जरूरत है कि हम फिर से शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। सरकार हर वो प्रयास कर रही है, जिससे इन दोनों क्षेत्रों की गुणवत्ता में सुधार हो सके।”



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