छत्तीसगढ़टॉप न्यूज़राज्य

खेत में मक्का दिखाना था, उग आई अफीम की ‘फिल्म’ – दुर्ग में कृषि विभाग की ऐसी ‘खेती’ कि अधिकारी भी रह गए दंग !”

खेत में मक्का दिखाना था, उग आई अफीम की 'फिल्म' - दुर्ग में कृषि विभाग की ऐसी 'खेती' कि अधिकारी भी रह गए दंग !”

15 अगस्त विज्ञापन

दुर्ग, 15 मार्च 2026 (गौरीशंकर गुप्ता ): छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा मक्का की फसल का प्रदर्शन प्लॉट बताकर रिपोर्ट किया गया खेत में अफीम की अवैध खेती लहलहा रही थी। जेवरा सिरसा चौकी क्षेत्र के समोदा गांव के खेतों में 5 से 7 एकड़ क्षेत्र में फैली यह फसल मक्के और ज्वार के पौधों के बीच चालाकी से छिपाई गई थी, जिसकी कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है।

पुलिस को 6 मार्च को गुप्त सूचना मिली कि समोदा, झेंझरी और सिरसा गांवों में मक्के की आड़ में अफीम उगाई जा रही है। एएसपी के नेतृत्व में पुलिस, एफएसएल टीम और एनसीबी अधिकारियों ने छापेमारी की, तो मक्के के पौधों के बीच अफीम के लहलहाते खेत दिखे। कलेक्टर अभिजीत सिंह भी मौके पर पहुंचे और ड्रोन से सर्वे कराया। भाजपा नेता विनायक ताम्रकार और उनके भाई विमल ताम्रकार के खेतों से जुड़ा यह मामला है, जहां तीन लोगों को हिरासत में लिया गया।

कृषि विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप:

जांच में सबसे बड़ा खुलासा कृषि विभाग से हुआ। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू ने विमल ताम्रकार के खेत (खसरा नंबर 309-310) को मक्का प्रदर्शन प्लॉट बताकर रिपोर्ट की, जबकि वहां धान और उसके पीछे अफीम उग रही थी। फसल सर्वेयर शशिकांत साहू ने सितंबर 2025 के डिजिटल सर्वे में भी गलत जानकारी अपलोड की। पटवारी अनिता साहू पर भी लापरवाही का आरोप। कलेक्टर ने तीनों को शोकॉज नोटिस जारी कर एकता साहू को निलंबित कर दिया। राज्य शासन को गुमराह कर प्रोत्साहन राशि भी जारी हो गई थी।

इस फर्जीवाड़े से अधिकारी दंग रह गए। रिपोर्ट में दूसरे किसान की फोटो लगाकर मक्का दिखाया गया, जबकि असल खेत में अफीम की ‘फिल्म’ चल रही थी। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने मौके का दौरा कर जवाबदेही मांगी, जिससे सियासत गरम हो गई। विनायक ताम्रकार ने इनकार किया, लेकिन भाजपा ने उन्हें सस्पेंड कर दिया।

पुलिस कार्रवाई और आगे की जांच:

पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया। फसल नष्ट कर सैंपल लिए गए। शिवनाथ नदी किनारे की उपजाऊ जमीन पर लंबे समय से यह अवैध कारोबार चल रहा था। जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। नशे के खिलाफ अभियान तेज करने की मांग उठी है। यह घटना छत्तीसगढ़ में सूखे नशे की समस्या पर सवाल खड़े करती है।

कुल मिलाकर, यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार को उजागर करता है। कृषि विभाग की गलत रिपोर्टिंग से करोड़ों का नुकसान और नशे का खतरा बढ़ा। कलेक्टर की सख्ती सराहनीय है, लेकिन पूरी साजिश उजागर होनी चाहिए।

15 अगस्त विज्ञापन
विज्ञापन 1
विज्ञापन 2
विज्ञापन 3
विज्ञापन 4
विज्ञापन 5
विज्ञापन 6
विज्ञापन 7
विज्ञापन 8

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!