Khabaron Ke Khiladi: हंगामे की भेंट चढ़ा बजट सत्र का पहला हिस्सा, किसकी रणनीति रही सफल, कौन गया चूक?

संसद सत्र का पहला चरण हंगामें की भेंट चढ़ गया। दो मुद्दों पर दोनों पक्षों का गतिरोध जारी रहा। पहला पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल नरवणे की किताब का मुद्दा और दूसरा अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील का मुद्दा। दोनों मुद्दों के केंद्र में रहे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी। मामला राहुल गांधी की संसद सदस्यता तक पहुंच गया। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, पीयूष पंत, राकेश शुक्ल, अजय सेतिया और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
रामकृपाल सिंह: जो लोग कानून बना रहे हैं कम से कम उनसे तो अपेक्षा होती है कि वो कानून का पालन करें। अगर आपको सचमुच में राष्ट्र की सुरक्षा की चिंता है तो आपका पहला सवाल होना चाहिए था कि जब इस किताब को परमिशन नहीं मिली तो ये छपी कैसे। आप उस किताब को आप सदन के बाहर लहरा रहे हैं। ये राष्ट्र की सुरक्षा से संबंधित है। ये पब्लिक डोमेन में गई कैसे उस पर रोक होनी चाहिए। जिसे गंभीर सवाल पूछने हैं उसे खुद गंभीर होना चाहिए।
अजय सेतिया: राहुल गांधी ने दो मुद्दे उठाए। पहला जनरल नरवणे की किताब का और दूसरा अमेरिका की ट्रेड डील का मुद्दा, ये दोनों ही मुद्दे गलत समय पर उठाए गए। संसद में एक नियम है, आप नियम के तहत नोटिस दीजिए और उस पर बहस कराइये। दोनों ही मुद्दों का नोटिस देकर वो उन्हें उठा सकते थे। इस मामले में भाजपा भी फर्स्टेशन में आ गई है। राहुल वही कर रहे हैं जो वो चाह रहे हैं। सोनिया गांधी विपक्ष की नेता रही हैं वो भी राहुल से बेहतर नेता विपक्ष थीं।
अनुराग वर्मा: पिछले तीन सत्र को देखें तो कोई न कोई वजह लेकर या यूं कहें ट्रिक लगाकर भेंट कर दिए गए। भेंट चढ़ने में फायदा सत्ता पक्ष को हुआ। ये एक तरह से संसद के समय की बर्बादी करके खबरों में बने रहने की कोशिश लगती है। राहुल गांधी संसद में उस तरह की हरकतें कर रहे हैं जो कॉलेज के दिनों में लड़के करते हैं। राहुल 20-22 साल के लड़कों के माइंडसेट से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
पीयूष पंत: राहुल गांधी के आरोपों में दम है। वो विपक्ष की भावनाएं जो हैं उसे को कह रहे हैं। मुझे लगता है कि सरकार को अपना पक्ष रखना चाहिए। मार्च में फाइनल एंग्रीमेंट होना है। उससे पहले कई बदलाव होंगे। वो बदलाव तब होंगे जब आप उसकी कमियों को उजागर करेंगे। हो सकता है कि विपक्ष की बात गलत भी हो, लेकिन अगर उन्हें मुद्दे नहीं उठाने देंगे तो सही कमियां भी कैसे सामने आएंगी।
राकेश शुक्ल: सबसे बड़ी चिंता यह है कि सदन को हाईजैक करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है। यह जनता के साथ भी छल जो अपने सांसद से यह उम्मीद रखते हैं कि संसद का सत्र चलेगा तो हमारा सांसद हमारे क्षेत्र के मुद्दे उठाएगा। बजट सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही यह कोशिश कर रहे थेे की हम आगे दिखें। यह स्थिति बहुत खतरनाक थी। स्पीकर ने जो अप्रत्याशित घटना हो सकने की बात कही गई उसकी जांच होनी चाहिए। निशिकांत दुबे की भी बातें संसदीय मर्यादा के हिसाब से ठीक नहीं लगीं।




