कांकेर-कोंडागांव समेत 7 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट: नारायणपुर में बिजली गिरेगी, बस्तर संभाग में 5 दिन बरसात, सेंट्रल-नॉर्थ पार्ट के कुछ हिस्से भीगेंगे – Chhattisgarh News

तस्वीर रायपुर की है जहां गुरुवार को बारिश हुई थी।
छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन बस्तर संभाग के जिलों में बरसात होगी। मौसम विभाग ने नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर समेत 7 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा बाकी अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहेगा। मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ ही स्थानो
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पिछले 24 घंटे की बात करें तो प्रदेश के सभी पांच संभाग के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश रिकॉर्ड की गई है। तापमान की बात करें तो शुक्रवार को सबसे अधिक टेंपरेचर 34 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव और सबसे कम न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस दुर्ग में दर्ज किया गया।
आज का अलर्ट।

बारिश की तस्वीरें देखिए-

गुरुवार शाम रायपुर में तेज बारिश हुई, कई जगह सड़कों पर पानी भर गया।

बलौदाबाजार का कौआडीह गांव बारिश के बाद टापू में तब्दील हो गया है।
बलरामपुर में अब तक 709 मिमी बरसा पानी
मौसम विभाग से जारी आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 1 जून से 18 जुलाई 2025 तक 424.4 मिलीमीटर पानी बरस चुका है। जो औसत से 4 फीसदी ज्यादा है। बलरामपुर में सबसे ज्यादा 709.1 मिमी पानी बरसा है।

बारिश के बाद झरनों की सुंदरता तस्वीरों में देखिए

बारिश के बाद जगदलपुर के तीरथगढ़ वाटरफॉल की खूबसूरती बढ़ गई है।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित तीरथगढ़ वाटरफॉल पूरी तरह शबाब पर है।

छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ के अमृतधारा की तस्वीर है। भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति है।

बस्तर का चित्रकोट वाटरफॉल भी अपने पूरे शबाब पर है।
लंबा रह सकता है मानसून
मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है।
अगर इस साल अपने नियमित समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी। इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है।



जानिए इसलिए गिरती है बिजली
दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके।
अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ।

आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी
- आकाशीय बिजली का तापमान सूर्य के ऊपरी सतह से भी ज्यादा होता है। इसकी क्षमता तीन सौ किलोवॉट मतलब 12.5 करोड़ वॉट से ज्यादा चार्ज की होती है।
- यह बिजली मिली सेकेंड से भी कम समय के लिए ठहरती है।
- यह मनुष्य के सिर, गले और कंधों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है।
- दोपहर के वक्त इसके गिरने की आशंका ज्यादा होती है।

आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ
- आकाशीय बिजली के एक चीज पर 2 बार नहीं गिरती।
- रबर, टायर या फोम इससे बचाव कर सकते हैं।
- अगर कोई नाव चला रहा हो तो बाहर आ जाना चाहिए।
- लम्बी चीजें आकाशीय बिजली से बचाव करती हैं।




