
दुर्ग : घटना दुर्ग जिले के एक सामान्य आवासीय इलाके में हुई, जहां छात्रा अपने परिवार के साथ रहती थी। सुबह घरवाले कमरे में घुसे तो छात्रा का शव छत के हुक पर लटका फंदे पर झूलता मिला। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की पुष्टि हुई। शव को दुर्ग जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया गया।
छात्रा की पहचान
मृतक छात्रा लगभग 16 वर्षीय थी और स्थानीय सरकारी स्कूल में 10वीं कक्षा की छात्रा थी। वह पढ़ाई में औसत दर्जे की थी, लेकिन परिवार के अनुसार हाल ही में वह उदास रहने लगी थी। पड़ोसियों ने बताया कि छात्रा शांत स्वभाव की थी और दोस्तों के बीच कम ही मिलती-जुलती। परिवार पिता-मां और दो छोटे भाई-बहनों का था, जो मजदूरी कर गुजारा चलाता था।
संभावित कारणों की पड़ताल
पुलिस जांच में सामने आया कि छात्रा के मोबाइल फोन में कुछ संदिग्ध चैट्स मिले, जो सोशल मीडिया पर उत्पीड़न या मानसिक तनाव की ओर इशारा करते हैं। परिजनों ने बताया कि स्कूल में परीक्षा का दबाव और घरेलू जिम्मेदारियां छात्रा को परेशान कर रही थीं। कुछ रिपोर्ट्स में पढ़ाई के प्रेशर को मुख्य कारण बताया गया। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सुसाइड नोट (यदि मिला) आने के बाद ही स्पष्टता आएगी। स्थानीय स्तर पर किशोरावस्था में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ते मामले चिंता का विषय बने हुए हैं।
दुर्ग पुलिस ने मामला आत्महत्या का दर्ज कर लिया है। एसपी कमलेश्वर सिंह के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। फॉरेंसिक टीम ने घर की तलाशी ली और साक्ष्य संग्रहित किए। परिजनों से पूछताछ जारी है। पुलिस ने स्कूल प्रशासन से छात्रा के रिकॉर्ड मंगवाए। जिले में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता अभियान तेज करने का ऐलान किया।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने शोक व्यक्त किया। महिला संगठनों ने किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की मांग की। चिकित्सकों का कहना है कि तनावग्रस्त बच्चों को समय पर काउंसलिंग जरूरी। यह घटना छत्तीसगढ़ में छात्र आत्महत्याओं की बढ़ती संख्या को उजागर करती है। प्रशासन को स्कूलों में काउंसलर नियुक्त करने चाहिए। परिवारों को बच्चों से खुलकर बात करने की सलाह दी जा रही।



