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Election: केरल में नतीजों से पहले कांग्रेस में घमासान, सीएम के चेहरे की लड़ाई से यूडीएफ की बढ़ी मुश्किलें

15 अगस्त विज्ञापन


केरल में चुनाव नतीजों से पहले सियासी माहौल गर्म हो गया है, लेकिन इस बार मुकाबला केवल विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ में मुख्यमंत्री पद को लेकर शुरू हुई अंदरूनी खींचतान ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

10 साल बाद सत्ता में वापसी की उम्मीद

राज्य में 9 अप्रैल को मतदान हो चुका है और अब 4 मई को नतीजों का इंतजार है। करीब 10 साल बाद सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए यूडीएफ खेमे में उत्साह तो है, लेकिन इसी बीच नेतृत्व को लेकर उठी बहस ने माहौल असहज कर दिया है।

केरल की राजनीति में लंबे समय तक हर चुनाव में सत्ता बदलने की परंपरा रही है, लेकिन 2021 में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे ने दोबारा सरकार बनाकर इस परंपरा को तोड़ दिया था। ऐसे में इस बार का चुनाव कांग्रेस और यूडीएफ के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री के दावदेरी आ रही सामने

इसी बीच कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर खुलकर दावेदारी सामने आने लगी है। वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला, विपक्ष के नेता वी डी सतीशान और संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल के समर्थक सार्वजनिक रूप से अपने-अपने नेता को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं।

क्या है विशेषज्ञों की राय?

यह बहस चुनाव परिणाम आने से पहले ही शुरू हो जाने से पार्टी नेतृत्व असहज स्थिति में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की खुली बयानबाजी से मतदाताओं के बीच गलत संदेश जा सकता है। वरिष्ठ मीडिया आलोचक एम एन करासेरी ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि सत्ता मिलने से पहले पद की लड़ाई जनता का भरोसा कमजोर कर सकती है।



इस विवाद का असर सहयोगी दलों पर भी पड़ने लगा है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता और विधायक पी अब्दुल हमीद ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर इस तरह की चर्चा सार्वजनिक नहीं होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि इससे यूडीएफ समर्थकों और जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता है, जो लंबे समय से विपक्ष में रहकर संघर्ष कर रहे हैं।



उन्होंने यह भी कहा कि जिन नेताओं को इस बहस को रोकना चाहिए था, वही इसे बढ़ावा दे रहे हैं। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी हाईकमान जो भी फैसला करेगा, सभी उसे मानेंगे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी केरल की राजनीति को अच्छी तरह समझते हैं और अंतिम फैसला सोच-समझकर लिया जाएगा।

कांग्रेस की गुटबाजी आ रही  है सामने

दूसरी ओर, वाम दलों ने इस पूरे विवाद पर चुप्पी साध रखी है और एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है। इसके उलट कांग्रेस में गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आने से कार्यकर्ताओं और सहयोगी दलों में बेचैनी बढ़ गई है। ऐसे में चुनाव नतीजों से पहले यूडीएफ के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि घर के भीतर की लड़ाई बनती दिख रही है।





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