Deva Barse: कुख्यात नक्सली कमांडर देवा बारसे ने किया सरेंडर!: अपने 20 से ज्यादा साथियों के साथ किया आत्मसमर्पण

Naxal Commander Deva Barse Surrender News: नक्सल मोर्चे पर फोर्स को एक के बाद एक सफलता मिल रही है। जहां बीजापुर और सुकमा में आज तीन जनवरी को 14 नक्सली मारे गये। वहीं नक्सलियों के पीएलजीए बटालियन नंबर एक के नक्सली कमांडर देवा बारसे के सरेंडर करने की खबर है। उसने छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में अपने 20 से ज्यादा साथियों के साथ पहुंचकर पुलिस के सामने हथियार समेत आत्मसमर्पण किया है। बताया जाता है कि पहले वह अपने 20 साथियों के साथ मुलुगु जिला पहुंचा। फिर उसे वहां से हैदराबाद लाया गया, जहां पर उसने पुलिस के सामने हथियार डाले। हालांकि इस संबंध में आधिकारिकतौर पर पुष्टि नहीं हुई है।
पिछले तीन दिनों से जारी है सस्पेंस
तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमावर्ती इलाके में पिछले तीन दिनों से इस मामले में सस्पेंस बरकरार है। माओवादी नेटवर्क से जुड़े अहम घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों की गतिविधियों के तेज होने की जानकारी मिल रही है, जिसमें माओवादी बटालियन नंबर एक के इंचार्ज बारसे देवा सहित 20 से अधिक माओवादियों के शामिल होने की बात कही जा रही है।
औपचारिक बयान बाकी
इस मामले में तेलंगाना पुलिस की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सीमा क्षेत्र से आ रही जानकारियों के अनुसार, कुछ इनपुट्स यह संकेत दे रहे हैं कि माओवादी समूह ने सुरक्षित मार्ग से तेलंगाना में प्रवेश कर वरिष्ठ अधिकारियों के सामने पेश होने की प्रक्रिया शुरू की। वहीं अन्य सूचनाओं में कहा जा रहा है कि सीमावर्ती इलाके में पुलिस की कार्रवाई के दौरान इन्हें नियंत्रण में लिया गया। माओवादियों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, कुछ रिपोर्ट्स में 12 से 15 तो कहीं 20 से ज्यादा लोगों का जिक्र है।
कोर्ट में सरेंडर करने की बात
दूसरी ओर तेलंगाना स्थित एक मानवाधिकार संगठन ने दावा किया है कि बारसे देवा और अन्य माओवादी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया है। संगठन ने मांग की है कि यदि गिरफ्तारी हुई है, तो उन्हें तत्काल न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। संगठन ने सुरक्षा अभियानों के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप भी दोहराए हैं और पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
प्रशासनिक सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि माओवादी नेतृत्व को लेकर पहले भी कई बार अपुष्ट खबरें सामने आती रही हैं, जिनकी बाद में पुष्टि नहीं हो सकी। फिलहाल तेलंगाना पुलिस और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि यह घटनाक्रम आत्मसमर्पण से जुड़ा है या किसी सुरक्षा कार्रवाई का परिणाम है।




