हाई कोर्ट से शांति सेठिया को झटका: 45 वर्ष से अधिक उम्र पर नहीं मिली अनुकंपा नियुक्ति

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जगदलपुर की रहने वाली शांति सेठिया को अनुकंपा नियुक्ति देने से इनकार करने के विभाग के फैसले को सही ठहराया है। शांति सेठिया ने अपनी मां के निधन के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक होने के कारण उनका आवेदन खारिज कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार की नीति और नियमों का पालन करने को अनिवार्य बताया है।
शांति सेठिया की मां शासकीय महाविद्यालय में सहायक के पद पर कार्यरत थीं। उनकी मां का निधन कैंसर के कारण हुआ था। यह भी उल्लेखनीय है कि शांति की मां को भी पूर्व में अनुकंपा के आधार पर ही नौकरी मिली थी। मां के निधन के बाद परिवार में आर्थिक संकट गहरा गया, जिसके चलते शांति ने अनुकंपा नियुक्ति की उम्मीद में आवेदन किया था।
शांति सेठिया ने अपनी मां के निधन के उपरांत अनुकंपा नियुक्ति के लिए संबंधित विभाग में आवेदन प्रस्तुत किया था। हालांकि, विभाग ने उनके आवेदन को इस आधार पर रद्द कर दिया कि उनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक हो चुकी थी, जो कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा का उल्लंघन था। विभाग के इस फैसले के बाद शांति ने न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
मामले की सुनवाई बिलासपुर हाई कोर्ट में जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने की। याचिकाकर्ता शांति सेठिया के वकील ने अदालत के समक्ष परिवार की गंभीर आर्थिक तंगी का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि परिवार में शांति के अलावा कोई अन्य कमाने वाला सदस्य नहीं है और वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। वकील ने 2007 के एक परिपत्र का भी उल्लेख करते हुए उम्र सीमा में छूट देने की मांग की, ताकि शांति को अनुकंपा नियुक्ति मिल सके।
हालांकि, राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में अपनी अनुकंपा नियुक्ति नीति का हवाला दिया। सरकार ने 14 जून 2013 को जारी नीति को प्रस्तुत किया, जिसके तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष निर्धारित की गई है। सरकार ने तर्क दिया कि शांति सेठिया इस निर्धारित आयु सीमा को पार कर चुकी हैं, और इसलिए उनका आवेदन नियमों के अनुसार ही खारिज किया गया था।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के तर्कों को स्वीकार करते हुए विभाग के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि नियमों का पालन करना अनिवार्य है और अधिकारियों द्वारा लिए गए फैसले में कोई अवैधता नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के नियम स्पष्ट हैं और उनका उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील द्वारा उद्धृत 2007 के परिपत्र को भी स्पष्ट किया। हाई कोर्ट ने बताया कि उम्र में छूट का यह नियम केवल मृत कर्मचारी की विधवा पत्नी के लिए लागू होता है, न कि मृत कर्मचारी की बेटी के लिए। चूंकि याचिकाकर्ता मृत कर्मचारी की बेटी हैं, इसलिए उन्हें इस विशेष छूट का लाभ नहीं मिल सकता। नियमों के तहत, केवल विधवा ही इस प्रकार की छूट की पात्र है।
इन सभी दलीलों और नियमों पर विचार करने के बाद, हाई कोर्ट ने शांति सेठिया की याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले के साथ ही शांति सेठिया की अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त करने की उम्मीदें टूट गईं और उन्हें अदालत से कोई राहत नहीं मिल पाई।



