Uncategorized
छत्तीसगढ़ विधानसभा में गूंजा ‘मन की बात’ का जिक्र, बालार्जुन की ताम्रपट्टिकाओं पर घिरे मंत्री राजेश अग्रवाल | Controversy Over Balarjun Copper Plate In Chhattisgarh Legislative Assembly

इस पर मंत्री ने बताया कि ताम्रपत्र पाण्डुलिपि की श्रेणी में नहीं आता था, लेकिन मल्हार का जो ताम्रपत्र है वो सबसे पहले 1987 में जुनवानी में कृषकों को प्राप्त हुआ था। जिसे डॉ. अहमद हसन खान से कृषकों से प्राप्त कर 18 जनवरी 1988 को राष्ट्रपति पुरस्कार से प्राप्त शिक्षक मल्हार निवासी रघुनंदन प्रसाद पाण्डेय को दिया। उस समय यह पाण्डुलिपि की श्रेणी में नहीं आए था, लेकिन बाद में अभी इसको केंद्र सरकार ने पाण्डुलिपि के रूप में स्वीकार किया है। इसका हमारे प्रधानमंत्री ने भी मन की बात कार्यक्रम में जिक्र किया था।
15 अगस्त विज्ञापन




