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छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुण देव गौतम ने बिलासपुर में कहा कि सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच विशेषज्ञ एजेंसी को सौंपी जाएगी

15 अगस्त विज्ञापन

छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुण देव गौतम ने बिलासपुर में कहा कि सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच विशेषज्ञ एजेंसी को सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है और आर्थिक अनियमितताओं की जांच के लिए विशेषज्ञ एजेंसी को जांच सौंपने का प्रस्ताव भेजा गया है। उनके इस बयान के बाद अब इस बहुचर्चित घोटाले की जांच EOW को सौंपे जाने की संभावना है।

DGP ने पुलिस की जांच और अब तक की कार्रवाई की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मामले की जांच ईमानदारी और साफ तरीके से की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी जांच किसी विशेषज्ञ एजेंसी से कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। इससे आर्थिक गड़बड़ी से जुड़े पहलुओं की जांच और बेहतर तरीके से हो सकेगी।

जशपुर में पिछले तीन साल में सर्पदंश से 96 मौतें दर्ज हुई हैं। वहीं, अकेले बिलासपुर में 431 मौतें दिखाकर 17 करोड़ 24 लाख रुपए का मुआवजा बांट दिया गया। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने यह मामला विधानसभा में उठाया था, जिसके बाद काफी हंगामा हुआ। इसके बाद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया।

सरकारी नियमों के अनुसार सर्पदंश से मौत होने पर मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। जांच में सामने आया कि इसी योजना का गलत फायदा उठाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। कई सामान्य मौतों को भी सर्पदंश से हुई मौत बताकर मुआवजा ले लिया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में परिजनों की जानकारी या सहमति के बिना ही मुआवजे की राशि निकाल ली गई। बाद में आरोपियों ने इस रकम को आपस में बांट लिया।

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