छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए वाणिज्य व्याख्याताओं की रिट अपील को खारिज कर दिया

15 अगस्त विज्ञापन

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए वाणिज्य व्याख्याताओं की रिट अपील को खारिज कर दिया है।

वहीं, राज्य सरकार की युक्तिकरण नीति के तहत अतिशेष घोषित कर ट्रांसफर किए गए शिक्षकों को राहत देने से इनकार कर दिया है। डिवीजन बेंच ने कहा कि जब मूल स्कूल में संबंधित विषय का एक भी छात्र नहीं है, तो वहां शिक्षकों को पदस्थ रखने का कोई औचित्य नहीं बनता।

दरअसल, जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ ब्लॉक के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सिवनी में शकुंतला राठौर और कृष्णा देवी साहू कॉमर्स व्याख्याता के पद पर कार्यरत थीं। राज्य सरकार की युक्तिकरण नीति के तहत जांच में पाया गया कि इस स्कूल में कॉमर्स विषय का एक भी छात्र नहीं है।

छात्र संख्या शून्य होने के कारण दोनों शिक्षिकाओं को अतिशेष घोषित कर दिया गया और काउंसलिंग के माध्यम से उनका तबादला मुंगेली जिले के दासरंगपुर और कोना के स्कूलों में कर दिया गया था।

भेदभाव का आरोप लगाकर लगाई थी याचिका

शिक्षिकाओं ने इस ट्रांसफर को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए तर्क दिया कि, काउंसलिंग के दौरान जिले के खाली पदों को छिपाया गया और विभाग ने मनमाने ढंग से भेदभावपूर्ण कार्रवाई की है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि ट्रांसफर पूरी तरह युक्तिकरण नीति की धारा 7(सी)(2) के तहत किए गए हैं।

इस नीति के अनुसार यदि किसी स्कूल में संबंधित विषय का कोई छात्र नहीं है, तो वहां के शिक्षकों को उन स्कूलों में भेजा जाएगा जहां छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। वरिष्ठ शिक्षकों को पहले जिला स्तर पर मौका दिया गया, जिसके बाद संभाग स्तर की काउंसलिंग से नियमानुसार पोस्टिंग दी गई है।

पसंद की जगह पर जमे रहने का अधिकार नहीं

सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि, ट्रांसफर और एडजस्टमेंट पूरी तरह से नियोक्ता के प्रशासनिक दायरे का काम है और इसमें न्यायिक समीक्षा सीमित होती है। शिक्षक अपनी पसंद की जगह या गृह जिले में ही जमे रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं जता सकते।

जब सिवनी स्कूल में कॉमर्स का कोई छात्र ही नहीं था, तो सरकार का उन्हें दूसरे स्कूल में भेजना नीति के तहत सही कदम है।

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