Chhath Puja in Chhattisgarh 2025: महादेव घाट में उमड़ा आस्था का सैलाब, डूबते सूर्य को दिया पहला अर्घ्य

Chhath Puja in Chhattisgarh 2025: चार दिवसीय छठ महापर्व के तीसरे दिन सोमवार को महादेव घाट स्थित खारून नदी तट पर शाम को आस्था का सैलाब उमड़ा। इस दौरान आस्था का सैलाब देखने को मिला। व्रती महिलाओं ने छठ पूजा स्थल महादेव घाट पहुंचकर वेदी पर दीप जलाई। विधि-विधान से छठ मैया की पूजा अर्चना की। पारंपरिक छठ गीत गाईं। इसके बाद डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य देकर फल-फूल को दौरा लेकर अपने घर के लिये प्रस्थान किये। इस दौरान बनारस से आये पंडितों ने खारून मैया की महाआरती की। इसमें पूर्व सीएम रमन सिंह, महापौर मीनल चौबे समेत बीजेपी के कई सीनियर नेता मौजूद रहे। छठ महापर्व आयोजन समिति के आयोजन प्रमुख राजेश कुमार समेत सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान महादेवघाट में काफी भीड़-भाड़ और रौनक देखने को मिली। वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम की धूम रही। छत्तीसगढ़ी भजनों के बाद भोजपुरी छठ गीत की गूंज चंहुओर गूंज रही थी। प्रयागराज के सोनाली एवं तरुण चोपड़ा टीम ने नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी।
28 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही पूजा का समापन होगा। छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, भिलाई-दुर्ग, कोरबा, अंबिकापुर, बस्तर एवं अन्य शहरों में यह पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। रायपुर में छठ पूजा 60 से अधिक स्थानों जैसे खारुन नदी के महादेव घाट, व्यास तालाब और अन्य तालाबों के किनारे इस वर्ष भी छठ पूजा धूम-धाम से मनायी जा रही है।
अंतर्राष्ट्रीय लोक गायिका और राम आएंगे… फेम स्वाती मिश्रा बांधा समां
महादेवघाट में भोजपुरी और छत्तीसगढ़ी दोनों संस्कृतियों की बयार बह रही थी। शाम 6 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। इसमें अंतर्राष्ट्रीय लोक गायिका और राम आएंगे… फेम स्वाती मिश्रा (मुंबई) छठ गीतों के प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ी लोकधारा के मशहूर कलाकार तिलक राजा साहू और केशरी साहू छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। जिसका भोजपुरी समाज और छत्तीसगढ़ी समाज ने आनंद लिया।
मान्यताओं के अनुसार छठी मैय्या विश्व की सबसे बड़ी स्वच्छता की ब्रांड एम्बेसडर हैं। छठ पर्व ही दुनिया का मात्र एक पर्व है जिसमें डूबते सूर्य एवं उगते की पूजा की जाती है। छठ पर्व को षष्ठी पूजा एवं सूर्य षष्ठी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है।
देश-विदेश में मनता है ये पर्व
सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। छठ पूजा सूर्य और उनकी बहन छठी मइया को समर्पित है। त्यौहार और व्रत के अनुष्ठान कठोर हैं और चार दिनों की अवधि में मनाए जाते हैं। इनमें पवित्र स्नान, उपवास और पीने के पानी से दूर रहना, लंबे समय तक पानी में खड़ा होना और प्रसाद, प्रार्थना और सूर्य देवता को अर्घ्य देना शामिल है। बिहार एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग जिस देश एवं राज्यों में जाकर बसे वहां भी अपनी संस्कृति को आज भी बचाये हुऐ हैं। छठ महापर्व नेपाल, फिजी, मॉरिशस, सूरीनाम, गुयाना एवं अन्य देशों में भी मनाया जाता है।
एक नजर में छठ पूजा 2025
- 25 अक्टूबर को नहाय-खाय के शुरुआत
- 26 अक्टूबर को खरना
- 27 अक्टूबर को डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य
- 28 अक्टूबर को उगते सूर्य को देंगे अर्घ्य
- 27 अक्टूबर की शाम को होगी भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति
- 27 अक्टूबर की शाम को खारून-गंगा मैया की महाआरती हुई
- 27 अक्टूबर की शाम को अंतर्राष्ट्रीय लोकगायिका स्वाती मिश्रा (मुंबई) देंगी छठ गीतों की प्रस्तुति




