रायपुर

चाचा ने ही बच्ची को खोजा और बोला:दुष्कर्म के बाद हत्या हुई…इसी से पुलिस को उस पर शक हुआ और पूछताछ में जुड़ती चली गई कड़ी-दर-कड़ी

15 अगस्त विज्ञापन

6 अप्रैल 2025, रामनवमी के दिन कन्या भोज के लिए निकली 6 साल की मासूम की लाश घर के पास खड़ी एक कार से बरामद हुई थी। मौके पर भीड़ थी, गुस्सा था और ज्यादातर सीसीटीवी बंद थे। परिजनों के अदालत में मुकरने के बावजूद पुलिस ने साक्ष्यों की ऐसी मजबूत कड़ी तैयार की कि अदालत ने आरोपी चाचा को मृत्युदंड की सजा सुनाई। केस दर्ज होने से लेकर फांसी के फैसले तक पुलिस ने कैसे इस मामले को परत दर परत उजागर किया, इस बारे में खुद एसएसपी विजय अग्रवाल बता रहे हैं… केस में ये चुनौतियां थीं- आरोपी सगा चाचा था जिसके खिलाफ गवाही को परिजन तैयार नहीं थे रामनवमी को बच्ची के पिता ने मोहन नगर थाने में बताया कि उनकी 6 साल की बेटी सुबह 10 बजे बुआ-दादी के घर कन्या भोज के लिए गई थी। तब से लापता है। पुलिस ने बीएनएस की धारा 137(2) के तहत गुमशुदगी दर्ज कर तलाश शुरू की। आरोपी चाचा भी बच्ची को तलाशने और लोगों के साथ हंगामा करने में लगा था। तभी वह घर के पास खाली प्लॉट में खड़ी कार के पास गया और चिल्लाया कि बच्ची यहां है। पोस्टमार्टम से पहले ही वह दावा करने लगा कि बच्ची से दुष्कर्म हुआ है। उसके इसी असामान्य व्यवहार ने पुलिस के कान खड़े कर दिए। बच्ची की मां ने शव की पहचान की। शव बरामद होते ही फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए। बुआ-दादी के घर की सीढ़ियों से बच्ची की सैंडल और पर्स बरामद हुए, जिससे यह साबित हुआ कि बच्ची उस परिसर से बाहर गई ही नहीं थी। 8 अप्रैल को आई शॉर्ट पीएम रिपोर्ट के आधार पर आरोपी चाचा को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इसके बाद डीएनए रिपोर्ट में उसका सैंपल मैच हो गया, जिसने पूरे घटनाक्रम की पुष्टि कर दी। शुरुआत में परिवार यह मानने को तैयार नहीं था कि सगा चाचा ऐसा कर सकता है। पिता का आरोप था कि उनके भाई को फंसाया जा रहा है। बाद में आरोपी भी अदालत में यह कहते हुए बयान से पलट गया कि पुलिस ने दबाव डालकर गुनाह कबूल करवाया था। गवाहों और परिजनों के मुकरने के बावजूद पुलिस ने केस को बयानों के भरोसे नहीं छोड़ा था। मौके से जुटाए गए भौतिक साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और पुख्ता डीएनए प्रोफाइलिंग अदालत में निर्णायक साबित हुए। फॉरेंसिक टीम और पुलिस की इसी पेशेवर जांच के आधार पर अदालत ने आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इस मामले में पुलिस को 5 चुनौतियां पेश आईं… पहली- घटना की मुख्य गवाह और साक्ष्य बच्ची थी, जिसकी मौत हो चुकी थी। दूसरी- मुख्य आरोपी बच्ची का सगा चाचा था। इस से परिजन उसके खिलाफ बयान देने से कतरा रहे थे। तीसरी- घटनास्थल पर ही बड़ा कानून-व्यवस्था का संकट था। इससे साक्ष्य प्रभावित हुए। चौथी- झुग्गी-बस्ती क्षेत्र होने से केवल एक ही सीसीटीवी फुटेज मिला। पांचवीं- सही गवाही मुश्किल थी। पुलिस ने इस पर पार पाया। (जैसा एसएसपी विजय अग्रवाल ने भास्कर के राजकुमार मधुकर को बताया)

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