BSP लोहा चोरी मामले में रसमड़ा फैक्ट्री के MD और डायरेक्टर गिरफ्तार, विधायक रिकेश सेन ने की CBI जांच की मांग


भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) से लोहा चोरी के मामले में पुलिस की जांच अब चोरी का स्क्रैप बाहर ले जाने वालों से आगे बढ़कर उसे खरीदने और इस्तेमाल करने वालों तक पहुंच गई है। रसमड़ा की रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड फैक्ट्री के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह की गिरफ्तारी की गई है। दोनों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
विधायक रिकेश सेन ने दावा किया है कि BSP में लंबे समय से बड़े पैमाने पर लोहा चोरी हुई है और इसकी रकम करीब 10 हजार करोड़ रुपए तक हो सकती है। हालांकि, यह विधायक का दावा है और पुलिस की ओर से इस आंकड़े की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है। विधायक ने कहा कि यह कार्रवाई अभी शुरुआत है और पुलिस की जांच आगे बढ़नी चाहिए। उनका आरोप है कि इस मामले में कई बड़े लोग, जनप्रतिनिधि और बीएसपी-सीआईएसएफ के कुछ अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
लोहा चोरी के इस मामले में विधायक रिकेश सेन लंबे समय से सोशल मीडिया के जरिए रसमड़ा की फैक्ट्री को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना था कि फैक्ट्री पर पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। इसके बाद विधायक ने 29 अगस्त को छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरुण देव गौतम को खुला पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने 12 बिंदुओं के जरिए पूरे मामले की जानकारी दी थी। विधायक ने पत्र में एक ट्रांसपोर्टर का भी जिक्र किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस उस ट्रांसपोर्टर को बचा रही है, जबकि वह समाजसेवी बनकर रोजाना लाखों रुपए बांटता है। विधायक ने यह भी आरोप लगाया था कि ट्रांसपोर्टर जेल में बंद अपराधियों की जमानत करवाने और उनकी मदद करने का काम करता है। विधायक का कहना था कि इसके बावजूद पुलिस अभी तक मामले की असली कड़ी तक नहीं पहुंच पाई है।
विधायक रिकेश सेन ने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि मामले में गिरफ्तार लोगों को एक महीने के अंदर ही जमानत मिल गई। हालांकि उन्होंने बताया कि पुलिस जमानत के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने की कोशिश कर रही है, ताकि केस को और मजबूत किया जा सके। उन्होंने कहा कि अभी एक और चालान पेश होना बाकी है और उसकी जांच जारी है। इस जांच में भी कुछ बड़े तथ्य सामने आ सकते हैं। विधायक ने कहा कि जिस तरह रसमड़ा की फैक्ट्री से जुड़े लोगों पर कार्रवाई हुई है, उसी तरह आगे और भी बड़े लोग जांच के दायरे में आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस फिलहाल एक संदेही और आरोपी के आधार पर जांच कर रही है। लेकिन पिछले 40 साल में हुए करीब 10 हजार करोड़ रुपए के लोहा चोरी के मामले की पूरी जांच और आरोपियों तक पहुंचने के लिए सीबीआई जांच जरूरी है।
इस मामले की शुरुआत BSP से चोरी किए गए करीब 250 टन लौह स्क्रैप की बरामदगी से हुई थी। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को चोरी करने के तरीके के बारे में भी जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, BSP से निकलने वाले फ्लू डस्ट के वाहनों में चोरी का लोहा छिपाकर ले जाया जाता था। इसके लिए केन, मैग्नेटिक क्रेन और दूसरे संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता था। 28 मई 2026 से पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू की। इसके बाद जांच आगे बढ़ने के साथ मामले की कड़ियां जुड़ती गईं और आरोपियों की संख्या भी बढ़ती गई। आरोप है कि फ्लू डस्ट ले जाने वाले वाहनों में चोरी का स्क्रैप लोड किया जाता था। इसके अलावा मैग्नेटिक क्रेन से BSP का लोहा फ्लू डस्ट वाले वाहनों में लोड किए जाने की बात भी जांच में सामने आई।
16 जून को संजय सिंह और पिंटू उर्फ उपेंद्र ओझा को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने संजय सिंह को इस मामले का कथित मास्टरमाइंड बताया है। इसके बाद पुलिस ने यह पता लगाने पर जांच शुरू की कि चोरी किया गया लोहा कहां-कहां भेजा जा रहा था और इसे कौन खरीद रहा था। इसी दौरान विधायक रिकेश सेन ने रसमड़ा की फैक्ट्री को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद पुलिस ने रसमड़ा की फैक्ट्री की भूमिका की भी जांच की। पुलिस के मुताबिक, जांच में पर्याप्त सबूत मिलने के बाद 18 सितंबर को रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया।
रसमड़ा फैक्ट्री के अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद विधायक रिकेश सेन ने कहा कि वह करीब चार महीने से इस फैक्ट्री की भूमिका की जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बीएसपी से चोरी किया गया लोहा रसमड़ा पहुंचता था और वहां से आगे कहां भेजा जाता था, इसकी भी जांच होनी चाहिए। विधायक ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग करने की बात कही है। उन्होंने दावा किया कि बीएसपी में लंबे समय से बड़े पैमाने पर लोहा चोरी हुई है। विधायक ने चोरी की रकम करीब 10 हजार करोड़ रुपए तक होने का दावा किया है। हालांकि, यह विधायक का दावा है और पुलिस की ओर से इस आंकड़े की पुष्टि नहीं हुई है। विधायक के मुताबिक, पूरे मामले की व्यापक जांच के लिए सीबीआई जैसी एजेंसी की जरूरत है। उन्होंने बीएसपी, सीआईएसएफ और अन्य स्तरों पर भी संभावित भूमिका की जांच की मांग की है। इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।




