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Blood Donation: ट्रांसजेंडर-समलैंगिक रक्तदान कर सकते हैं या नहीं? सुप्रीम कोर्ट में हुई चर्चा, जानिए क्या निकला फैसला

15 अगस्त विज्ञापन


रक्तदान को महादान कहा जाता है, आपकी ये छोटी सी पहल आपातकालीन स्थितियों में लोगों की जान बचाने वाली हो सकती है। गंभीर स्थितियों जैसे दुर्घटना, सर्जरी के दौरान रोगी को अतिरिक्त खून की आवश्यकता होती है, यहीं आपके द्वारा किया गया रक्तदान बड़ी भूमिका निभा सकता है। हालांकि चिंताजनक बात ये है कि  भारत में हर दिन लगभग 12,000 मरीज समय पर रक्त न मिल पाने के कारण मर जाते हैं। देश में रक्तदान के डिमांड और सप्लाई में काफी अंतर है।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 18 से 65 वर्ष की आयु का स्वस्थ व्यक्ति (महिला या पुरुष) जिसका वजन कम से कम 50 किलोग्राम हो और हीमोग्लोबिन लेवल कम से कम 12.5-13.0 की बीच हो, वह स्वेच्छा से रक्तदान कर सकता है।

अब सवाल ये है कि क्या समलैंगिकों, ट्रांसजेंडर और यौनकर्मी भी खून का दान कर सकते हैं? तो इसका जवाब है नहीं। 

गुरुवार (12 मार्च 2026) को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तमाम समीक्षाओं के बाद समलैंगिक, ट्रांसजेंडर और यौनकर्मियों पर रक्तदान को लेकर प्रतिबंध बरकरार रखा गया है। आखिर ये लोग रक्तदान क्यों नहीं कर सकते, आइए इस बारे में जान लेते हैं।



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15 अगस्त विज्ञापन
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