
गौरीशंकर गुप्ता /बिलासपुर: बिलासपुर में पुलिस की गुंडागर्दी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया। रतनपुर थाने के ASI दिनेश तिवारी ने स्वास्थ्य मंत्री के कथित रिश्तेदार विनोद जायसवाल को 15-20 थप्पड़ जड़ दिए। SSP राजनेश सिंह ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी ASI को सस्पेंड कर दिया और FIR दर्ज कराई।
मंगलवार रात को विनोद जायसवाल अपने किसी केस की जानकारी लेने रतनपुर थाने पहुंचे। ASI दिनेश तिवारी ने सवाल करने पर भड़कते हुए कहा, “तेरी नेतागिरी सब निकाल दूंगा” और फिर 15-20 थप्पड़ मार दिए। पीड़ित के कान सुन्न हो गए और सिरदर्द की शिकायत हुई। डॉक्टरों ने जांच शुरू की।
पीड़ित ने बताया कि ASI ने जेल भेजने की धमकी दी। मामला स्वास्थ्य मंत्री के रिश्तेदार होने के कारण राजनीतिक रंग ले लिया। स्थानीय लोगों ने इसे खाकी का रसूख बताया। थाने में CCTV फुटेज की जांच की जा रही है।
SSP का त्वरित एक्शन
SSP राजनेश सिंह को जानकारी मिलते ही वे मौके पर पहुंचे। उन्होंने ASI को तत्काल निलंबित किया और विभागीय जांच के आदेश दिए। उसी थाने में पीड़ित की शिकायत पर IPC की धारा 323, 294, 506 के तहत FIR दर्ज हुई। आरोपी को गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू हो गई।
पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। SSP ने सभी थानों को सख्त निर्देश जारी किए कि जनता से अभद्र व्यवहार बर्दाश्त नहीं। यह कार्रवाई पुलिस सुधार की मिसाल बन गई।
स्वास्थ्य मंत्री के रिश्तेदार होने से विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेसी नेताओं ने इसे सत्ता के रसूख का दुरुपयोग बताया। BJP ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है। मंत्री ने चुप्पी साधी, लेकिन उनके करीबियों ने पीड़ित का समर्थन किया।
विनोद जायसवाल को सदर अस्पताल में भर्ती किया गया। कान में सुन्नपन और सिरदर्द बना हुआ। उन्होंने कहा, “सिर्फ केस पूछा था, इतनी गुंडागर्दी अपेक्षित नहीं।” परिवार ने न्याय की मांग की। मंत्री के रिश्ते का हवाला देकर कोई विशेष सुविधा नहीं ली गई।
SSP ने कहा, “कठोर कार्रवाई सुनिश्चित। कोई भी uniformed व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं।” ASI का पुराना रिकॉर्ड खराब पाया गया। आंतरिक जांच में अन्य शिकायतें भी सामने आईं। विभाग ने इसे काला धब्बा बताया।
बिलासपुर में पुलिस-जनता टकराव के पुराने मामले रहे। घुमारवीं जैसे इलाकों में खाकी पर रसूख दिखाने के आरोप लगे। यह घटना सुधार की जरूरत बताती है। SSP ने ट्रेनिंग कार्यक्रम शुरू करने का ऐलान किया।
आरोपी ASI को कोर्ट में पेश किया जाएगा। विभागीय जांच 15 दिनों में पूरी। पीड़ित को मुआवजा मिलने की संभावना। यह मामला पुलिस रिफॉर्म्स पर नई बहस छेड़ सकता। बिलासपुर पुलिस अब सुधार के रास्ते पर।



