छत्तीसगढ़राज्य

भटगांव में एकाकी हाथी के हमले में 40 दिन के नवजात की दर्दनाक मौत, ग्रामीणों ने वन विभाग की देरी पर जताई नाराज़गी

A 40-day-old infant tragically died in an attack by a lone elephant in Bhatgaon; villagers expressed anger over the forest department's delay in responding

15 अगस्त विज्ञापन

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के भटगांव थाना क्षेत्र के डुमरिया बिट स्थित ग्राम पंचायत चिकनी धरमपुर में बीती रात एकाकी हाथी के हमले में मात्र 40 दिन के नवजात की दर्दनाक मौत हो गई। घटना रात लगभग 1 बजे की बताई जा रही है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के थाना कोटेसरा निवासी प्रवासी मजदूर दंपति गुड़ फैक्ट्री में काम के सिलसिले में यहां आए थे और परिवार सहित फैक्ट्री के पास अस्थायी झोपड़ी में रह रहे थे।​

सोनगरा जंगल से भटका एक हाथी गुड़ की तेज गंध से आकर्षित होकर झोपड़ी की ओर आया और उसे पूरी तरह तोड़ डाला। हमले के दौरान दंपति किसी तरह झोपड़ी से बाहर निकल निकले, लेकिन उनका नवजात शिशु हाथी के भारी पैरों तले कुचल गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। आसपास के ग्रामीणों ने फौरन वन विभाग को सूचना दी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि टीम काफी देर से पहुंची, जिससे इलाके में आक्रोश फैल गया।​

यह घटना सूरजपुर जिले में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष की पुष्टि करती है। हाल ही में भटगांव थाना के कपसरा बिसाही पोड़ी गांव में ही एक हाथी ने खलिहान में सो रहे दंपति कबिलास राजवाड़े (42) और धनियारो (38) को कुचलकर मार डाला था। वह हादसा भी रात 2 बजे के आसपास हुआ, जब वे धान की रखवाली कर रहे थे। वन विभाग की टीम वहां भी देरी से पहुंची और हाथी की लोकेशन ट्रैक नहीं कर पाई।​

ग्रामीणों में वन विभाग की लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी है। चिकनी धरमपुर के निवासियों का कहना है कि जंगल से सटे क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी की पहले से चेतावनी नहीं दी जाती। गुड़ फैक्ट्री जैसे स्थानों पर खाद्य गंध हाथियों को खींच लाती है, लेकिन रात्रि गश्त या सोलर फेंसिंग जैसे उपाय नदारद हैं। कपसरा घटना में भी ग्रामीणों ने विभाग पर निगरानी के नाम पर फिजूलखर्ची का आरोप लगाया था।​

प्रवासी दंपति की पहचान अभी पूरी तरह सामने नहीं आई, लेकिन वे मुजफ्फरनगर से मजदूरी हेतु आए थे। नवजात की मां शोक में टूट चुकी है, जबकि पिता सदमे में डूबे हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मुआवजे की प्रक्रिया तेज कर दी गई। वन विभाग ने आसपास के गांवों में अलर्ट जारी किया है, ग्रामीणों से रात में अकेले न घूमने और हाथी दिखने पर तुरंत सूचना देने को कहा है।​​

सूरजपुर में हाथी आतंक चरम पर है। नवंबर 2025 में ही कई जिलों में हाथियों ने चार लोगों की जान ली, जिसमें सूरजपुर के दो मामले प्रमुख हैं। जंगलों की कटाई, खेती का विस्तार और फसल गंध हाथियों को बस्तियों में धकेल रही है। विशेषज्ञ ड्रोन ट्रैकिंग, कॉरिडोर निर्माण और जागरूकता अभियान की सिफारिश करते हैं।​

दूरस्थ चिकनी धरमपुर जैसे गांवों में चिकित्सा और वन्यजीव सुरक्षा की कमी गंभीर समस्या है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से तत्काल मुआवजा, बच्चों की शिक्षा भत्ता और स्थायी सुरक्षा की मांग की है। वन मंत्री से हस्तक्षेप की भी अपील हो रही है। गुड़ फैक्ट्री प्रबंधन ने मजदूरों के लिए पक्के आवास और रात्रि सुरक्षा उपकरण देने का वादा किया है।​

स्थानीय विधायक ने वन विभाग पर सख्त कार्रवाई का ऐलान किया। ऐसे हमलों से मजदूर भाग रहे हैं, जिसका असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। वन्यजीव संगठनों ने केंद्र की मानव-वन्यजीव नीति लागू करने की मांग की, जिसमें 5 लाख तक मुआवजा और बीमा शामिल है। एकाकी हाथी सबसे खतरनाक साबित हो रहे हैं।​​

यह त्रासदी पूरे सूरजपुर को झकझोर गई। नवजात की मौत ने शोक की लहर पैदा कर दी। ग्रामीण सतर्कता बरत रहे हैं, लेकिन विभाग की तत्परता पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन को अब कड़े कदम उठाने होंगे।

15 अगस्त विज्ञापन
विज्ञापन 1
विज्ञापन 2
विज्ञापन 3
विज्ञापन 4
विज्ञापन 5
विज्ञापन 6
विज्ञापन 7
विज्ञापन 8

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!