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भारत माला घोटाला…बैकडेट में अफसरों ने किया जमीन बटांकन: रायपुर–महासमुंद में कारोबारियों के ठिकानों से 40 लाख कैश,डिजिटल सबूत मिले;ED ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाया – Raipur News

15 अगस्त विज्ञापन


भारत माला घोटाला मामले में ईडी को रायपुर–महासमुंद में कारोबारियों के ठिकानों से 40 लाख रुपए कैश और डिजिटल सबूत मिले हैं।

भारत माला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्नम हाईवे के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में बड़े मुआवजा घोटाले का खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 29 दिसंबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत रायपुर और महासमुंद जिलों में एक साथ 10 ठिकानों पर छ

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इस कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने करीब 40 लाख रुपए कैश, कई डिजिटल डिवाइस और बड़ी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। ऐसे में जांच एजेंसी ने कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। जांच में पाया गया कि बैकडेट में अफसरों ने जमीन का बटांकन किया था।

यह कार्रवाई एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर में दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। इस एफआईआर में तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) निर्भय साहू सहित कई अधिकारियों और निजी व्यक्तियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत कर भारत माला परियोजना के तहत अधिग्रहित भूमि के राजस्व अभिलेखों में हेरफेर किया और शासन से वास्तविक राशि से कहीं अधिक मुआवजा प्राप्त किया।

कार्रवाई से जुड़ी तस्वीरें…

ये महासमुंद के जसबीर बग्गा का मकान है। यहां ED की छापेमारी की थी।

लॉ विस्टा‌ में हरमीत‌ खनूजा के घर कार्रवाई की गई थी। बाहर सुरक्षाबल तैनात रहे।

लॉ विस्टा‌ में हरमीत‌ खनूजा के घर कार्रवाई की गई थी। बाहर सुरक्षाबल तैनात रहे।

जमीन के कृत्रिम बंटवारे से खेला गया खेल

ED की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने साजिश के तहत जमीन के बड़े टुकड़ों को परिवार के सदस्यों के नाम पर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा। यह बंटवारा कागजों में पिछली तारीख दर्शाकर किया गया, ताकि यह दिखाया जा सके कि अधिग्रहण से पहले ही जमीन कई खातेदारों में बंटी हुई थी।

इस तरह मुआवजा नीति का फायदा उठाते हुए हर हिस्सेदार के नाम अलग-अलग मुआवजा स्वीकृत कराया गया और सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए की राशि निकाली गई।

40 लाख कैश, डिजिटल सबूत और संपत्तियों की पहचान

तलाशी के दौरान ED को करीब 40 लाख रुपए कैश, मोबाइल, लैपटॉप, पेनड्राइव सहित कई डिजिटल डिवाइस और जमीन से जुड़े अहम दस्तावेज मिले हैं। इसके साथ ही एजेंसी ने अपराध की आय (POC) से खरीदी गई कई चल-अचल संपत्तियों की भी पहचान की है, जिन्हें जल्द अटैच किया जा सकता है।

ED अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इस मुआवजा घोटाले में और बड़े नामों के सामने आने की संभावना है।

जांच के दायरे में सरकारी अधिकारी भी

ED के मुताबिक, भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा राशि के निर्धारण और भुगतान में गड़बड़ियों में कई लोगों के नाम शामिल हैं। जांच के दायरे में कुछ निजी व्यक्तियों, उनके सहयोगियों, सरकारी अधिकारियों और जमीन मालिकों के ठिकाने शामिल किए गए हैं।

ईडी की कार्रवाई हरमीत सिंह खनूजा, सहयोगी, कुछ सरकारी अधिकारी और भूमि अधिग्रहण से जुड़े जमीन मालिक शामिल हैं। बताया जा रहा है कि मुआवजा वितरण में नियमों के उल्लंघन और संदिग्ध लेन-देन को लेकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

कौन हैं हरमीत सिंह खनूजा ?

हरमीत सिंह खनूजा छत्तीसगढ़ के रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर से जुड़े भूमि क्षतिपूर्ति भुगतान घोटाले में नामजद एक भूमि दलाल/ एजेंट हैं। आरोप है कि उन्होंने भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को फर्जी तरीके से हासिल करने/बंटवाने में मदद की, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।

उन्होंने कागजों में फर्जी दस्तावेज, नकली बंटवारे और म्यूटेशन (बदलाव) कर के मुआवजा प्राप्त किया और पैसा अलग खातों में ट्रांसफर किया। 25 अप्रैल 2025 को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने उनके खिलाफ छापेमारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई की।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, भारत माला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर भुगतान घोटाले में हरमीत सिंह खनूजा मुख्य आरोपी और जमीन दलाल है। हरमीत खनूजा ने अपनी पहली पत्नी को तलाक देकर हरमीत सिंह चावला की बेटी तहसीलदार रविंदर कौर से शादी की थी।

ईडी की छानबीन में आरोपी के ससुर हरमीत सिंह चावला के पास घोटाले से जुड़े पैसों के लेनदेन और महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। दोनों कारोबारियों के घरों से अब तक क्या मिला है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। ED की टीमें अभी भी डिजिटल साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।

जानिए कैसे हुआ घोटाला ?

भारत-माला प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण मामले में 43 करोड़ का घोटाला हुआ है। जमीन को टुकड़ों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ का भुगतान दिखाया गया। SDM, पटवारी और भू-माफिया के सिंडिकेट ने बैक डेट पर दस्तावेज बनाकर घोटाले को अंजाम दिया।

इस केस में दैनिक भास्कर डिजिटल में खबर छपने के बाद कोरबा डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को सस्पेंड किया गया था। इसके पहले जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को सस्पेंड किया गया था।

शशिकांत और निर्भय पर जांच रिपोर्ट तैयार होने के 6 महीने बाद कार्रवाई हुई थी। निर्भय कुमार साहू सहित 5 अधिकारी-कर्मचारियों पर 43 करोड़ 18 लाख रुपए से ज्यादा राशि की गड़बड़ी का आरोप है।

जमीन को टुकड़ों में बांटा, 80 नए नाम चढ़ाए

राजस्व विभाग के मुताबिक, मुआवजा करीब 29.5 करोड़ का होता है। अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में भू-माफिया ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन को छोटे टुकड़ों में काटकर 159 खसरे में बांट दिया।

मुआवजा के लिए 80 नए नाम रिकॉर्ड में चढ़ा दिए गए। इससे 559 मीटर जमीन की कीमत करीब 29.5 करोड़ से बढ़कर 70 करोड़ से ज्यादा पहुंच गई। अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के लिए 324 करोड़ मुआवजा राशि निर्धारित की गई। जिसमें से 246 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं 78 करोड़ रुपए का भुगतान अभी रोक दिया गया है।

क्या है भारत माला परियोजना ?

भारत माला परियोजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना है, जिसके तहत करीब 26 हजार किलोमीटर आर्थिक कॉरिडोर विकसित किए जाने हैं। यह कॉरिडोर गोल्डन क्वाड्रिलेटरल, नॉर्थ-साउथ और ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जुड़ेंगे। देश के अधिकांश फ्रेट ट्रैफिक को इन्हीं मार्गों से ले जाने की योजना है। रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर इसी परियोजना का अहम हिस्सा है।



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