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बालोद के वनांचल में हुई अनूठी शादी: 40 का दूल्हा, 38 की दुल्हन; ‘ठेका विवाह’ परंपरा से एक दिन में निभाईं सारी रस्में – Balod News

15 अगस्त विज्ञापन


छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डोंडी ब्लॉक के वनांचल ग्राम टेकाडोढ़ा में महार समाज ने एक अनूठी शादी का आयोजन किया। यह शादी प्राचीन परंपरा ‘ठेका विवाह’ के रूप में संपन्न हुई।

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इस विवाह में ग्राम फरदडीह की 38 वर्षीय माधुरी सहारे की शादी टेकाडोढ़ा के 40 वर्षीय रामेश्वर उंदरा से हुई। ठेका विवाह की परंपरा के अनुसार, वधू पक्ष के लोग वर के घर गए। सभी रस्में एक ही दिन में पूरी की गईं। फेरे भी वर के घर में ही लिए गए।

यह रिश्ता कन्या पक्ष के जीजा दीपक आरदे के माध्यम से तय हुआ। दीपक का बालोद में आना-जाना लगा रहता था। रामेश्वर बालोद के एक भोजनालय में काम करते थे। वे अक्सर दीपक से अपनी शादी के लिए बात करते थे। दीपक ने ही रामेश्वर को अपनी साली माधुरी के बारे में बताया।

बिना किसी दिखावे और फिजूल खर्च के सादगीपूर्वक संपन्न हुई शादी।

जिले में चर्चा का विषय बनी शादी

यह शादी बिना किसी दिखावे और फिजूल खर्च के सादगीपूर्वक संपन्न हुई। यह शादी आज पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है। यह विवाह वनांचल की प्राचीन संस्कृति को भी दर्शाता है, जो वर्तमान समय में विलुप्त होती जा रही है।

फिजूल खर्ची रोकने का दिया संदेश

माधुरी के जीजा दीपक आरदे के जरिए यह रिश्ता बंधा और ठेका विवाह पद्धति के जरिए दोनों ने दांपत्य जीवन में कदम रखा। आज महंगाई के दौर में विवाह काफी खर्चीली होती जा रही है। ऐसे में आदर्श और सादगी पूर्ण विवाह संपन्न कर समाज ने फिजूल खर्ची रोकने का संदेश दिया।

पारंपरिक बाजे के बीच बिना किसी तामझाम के यह ठेका विवाह कराया गया। सभी ने नव दंपत्ति को उज्जवल भविष्य की मंगल कामनाओं के साथ आशीर्वाद दिया।



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15 अगस्त विज्ञापन
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