अंबिकापुर: खाद्यान्न गबन प्रकरण में कोतवाली पुलिस की बड़ी सफलता, मुख्य आरोपी मुकेश यादव गिरफ्तार
Ambikapur Kotwali police achieves major success in foodgrain embezzlement case main accused Mukesh Yadav arrested

अंबिकापुर : अंबिकापुर में खाद्यान्न गबन प्रकरण में कोतवाली पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। खाद्य विभाग की संयुक्त जांच में सामने आए लगभग 64 लाख 94 हजार रुपए से अधिक के गबन मामले के मुख्य आरोपी मुकेश यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। इससे पहले भी इस मामले में आरोपी सुनीता पैकरा को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
यह मामला जनकल्याण खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उपभोक्ता सेवा सहकारी समिति घुटरापारा द्वारा संचालित तीन सरकारी उचित मूल्य राशन दुकानों में सितंबर 2022 से मार्च 2024 के बीच हुए गबन का है। जांच में पाया गया कि इन दुकानों से 1631.29 क्विंटल चावल, 10.43 क्विंटल शक्कर और 48.34 क्विंटल चना राशन गायब था, जिसकी कीमत लगभग 64.94 लाख रुपए है। यह राशन गरीबों को उपलब्ध कराए जाने के बजाय अवैध रूप से बाजार में बेच दिया गया था।
इस घोटाले में समिति के अध्यक्ष पवन सिंह, उपाध्यक्ष सुनीता पैकरा, सहायक विक्रेता फरहान सिद्धीकी, प्रिंस जायसवाल, सैफ अली और मुकेश यादव मुख्य आरोपित हैं। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420 (धोखाधड़ी), 409 (विश्वासघात), 120-बी (साजिश), तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम की धाराओं 3 और 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अंबिकापुर के कलेक्टर विलास भोसकर के आदेश पर खाद्य निरीक्षक शिवकुमार मिश्रा ने जांच कराई थी। भाजपा नेत्री आलोक दुबे की शिकायत की जांच में यह बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया। आरोपितों ने सरकारी राशन का वितरण दिखावा करते हुए वास्तविक राशन का अपहरण किया और इसे निजी भंडारों या बाजार में बेच दिया।
पुलिस ने मुकेश यादव को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया, जिसमें उसने अपने अपराध की बात स्वीकार की। पुलिस की तीन टीमें बाकी आरोपितों की खोज में सक्रिय हैं। पुलिस का मानना है कि घोटाले में अभी और लोगों का भी हाथ हो सकता है।
यह मामला सार्वजनिक वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता को चुनौती देता है और गरीबों के लिए सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की आवश्यकता को उजागर करता है। प्रशासन ने दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया है ताकि भविष्य में ऐसा कोई मामला न हो।
पुलिस टीम जिसमें थाना प्रभारी शशिकांत सिन्हा, उपनिरीक्षक विजय गुप्ता और आरक्षक आनंद गुप्ता, नितिन सिन्हा, अतुल सिंह शामिल हैं, ने इस गहन जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रशासन और पुलिस की यह संयुक्त कार्रवाई एक संदेश है कि सरकारी राशन के गबन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यहां जारी विभागीय और पुलिस कार्रवाई को देखकर यह आशा की जा सकती है कि अंबिकापुर में राशन वितरण प्रणाली को चोरी और भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। गरीब जनता को उनकी मूलभूत आवश्यकताओं का सही लाभ मिलना सुनिश्चित करने के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण हैं।
अंततः यह मामला यह दर्शाता है कि सरकार और प्रशासन की जागरूकता एवं सक्रियता से ही जनता के अधिकारों की रक्षा संभव है, और ऐसे घोटाले रोकने के लिए कड़े नियम और उनका प्रभावी पालन आवश्यक है।




