अधूरे पुल से नदी पार कर रहे स्कूली बच्चों का मामला एनएचआरसी के संज्ञान में, मुख्य सचिव को दो सप्ताह में रिपोर्ट देने का नोटिस


मैनपुर ब्लॉक के खामभाठा गांव में पैरी नदी पर अधूरे पुल से जान जोखिम में डालकर नदी पार करने वाले स्कूली बच्चों के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
बता दें कि खामभाठा और पंचायत मुख्यालय देहारगुड़ा के बीच वर्ष 2021 में 5.66 करोड़ रुपए की लागत से पुल स्वीकृत हुआ था, जो सालों बाद भी अधूरा है। अब इसकी मियाद दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।
पुल निर्माण का ठेका लोक निर्माण विभाग की सेतु शाखा ने बिलासपुर की मेसर्स नटराज इंफ्रा बिलकॉन को दिया है।
जानलेवा सफर: 30 से अधिक स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को नदी पार करने के लिए 20 फीट ऊंची अस्थायी सीढ़ी और सेंटरिंग प्लेट का सहारा लेना पड़ता है।
हादसे का खतरा: पुल पर खुले सरिए और दोनों तरफ गहरी खाई है। बारिश में नदी का बहाव तेज होने पर यह सफर और भी खतरनाक हो जाता है।
अस्थायी उपाय: प्रशासन ने लोहे की छड़ वाली सीढ़ी हटाकर प्लेट की सीढ़ी जरूर बनवाई है, लेकिन ग्रामीणों और बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।


