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द्वीप्ति योजना से छत्तीसगढ़ की 801 महिलाएं बनेंगी सौर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई पहचान

15 अगस्त विज्ञापन

रायपुर,  अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाएं अब स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। कभी स्व-सहायता समूहों के माध्यम से पारंपरिक आजीविका गतिविधियों से जुड़ी महिलाएं अब सौर ऊर्जा जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित ‘द्वीप्ति योजना’ (DWEEPTI) ग्रामीण महिलाओं को ऊर्जा उद्यमी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जोड़कर छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की महिलाओं को सोलर दीदी के रूप में तैयार किया जा रहा है। ये महिलाएं गांव-गांव सौर ऊर्जा का उजियारा पहुंचाने के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह पर आगे बढ़ रही हैं।

प्रदेश में अब तक बिहान मिशन से जुड़ी 801 महिलाओं को ‘सोलर दीदी’ के रूप में चिन्हांकित किया गया है। वहीं 19 संकुल स्तरीय संगठनों (सीएलएफ) का सोलर वेंडर के रूप में पंजीयन किया जा चुका है। राज्य के विभिन्न जिलों में 94 सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं तथा 415 सोलर स्थापना के प्रकरण प्रक्रियाधीन हैं। यह प्रगति दर्शाती है कि ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की यह पहल अब धरातल पर आकार ले रही है।

महिलाएं अब केवल हितग्राही नहीं, बल्कि बनेंगी ऊर्जा उद्यमी

द्वीप्ति योजना का पूरा नाम ‘डिसेंट्रलाइज्ड वूमेन एम्पावरमेंट ऑन एनर्जी एंड पॉलिसी फॉर ट्रांसफॉर्मेटिव इन्क्लूजन’ है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा तकनीकी सहयोगी संस्था ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के साथ ग्रीन इकोनॉमी ट्रांजिशन मिशन के अंतर्गत विकसित इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की मुख्यधारा से जोड़ना है।

योजना की विशेषता यह है कि इसमें महिलाओं को केवल सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाली हितग्राही नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा क्षेत्र में वेंडर, तकनीशियन, प्रबंधक और उद्यमी के रूप में विकसित किया जा रहा है। महिला स्व-सहायता समूहों के संकुल स्तरीय संगठनों को अधिकृत सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत कर उन्हें व्यवसाय संचालन का अवसर दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़कर तकनीक आधारित रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं।

इस पहल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ महिलाओं को स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। महिला संकुल संगठनों को उद्यम के रूप में विकसित कर उन्हें सोलर सिस्टम की स्थापना, संचालन और रखरखाव जैसी सेवाओं से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। यह प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के लखपति दीदी के संकल्प को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास है।

कबीरधाम से मिली नई दिशा, सोलर दीदियों ने संभाली तकनीकी जिम्मेदारी

द्वीप्ति योजना के प्रारंभिक क्रियान्वयन में कबीरधाम जिला एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है। जिले में बिहान मिशन के अंतर्गत कवर्धा के वंदेमातरम् महिला संकुल स्तरीय संगठन को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अधिकृत सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत किया गया है। यहां स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर सोलर दीदी के रूप में तैयार किया गया।

जिले के ग्राम समनापुर में इस पहल के अंतर्गत शुरुआती रूफटॉप सोलर सिस्टम की स्थापना की गई। प्रगति आजीविका ग्राम संगठन के अंतर्गत माता भवानी स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती अंजनी पटेल भी इस प्रशिक्षण से लाभान्वित होने वाली महिलाओं में शामिल हैं। उनके लिए सौर ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने का अवसर आजीविका की नई उम्मीद लेकर आया है। यह पहल अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी तकनीकी कार्यों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही है।

कबीरधाम में सोलर पैनल स्थापना से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से प्रति सोलर दीदी को प्रत्येक स्थापना पर 500 से 1000 रुपए तक आय होने का अनुमान है। वहीं महिला संकुल संगठन के लिए भी अतिरिक्त आमदनी के अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

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