बिलासपुर में सियासी घमासान: कांग्रेस ने विधायक अमर अग्रवाल से मांगा इस्तीफा, ‘शहर की समस्याओं पर मौन’ का आरोप
बिलासपुर की राजनीति में बुधवार को उस समय नया सियासी घमासान देखने को मिला, जब कांग्रेस के पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने शहर विधायक अमर अग्रवाल पर सीधा हमला बोलते हुए शहर की समस्याओं पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। पांडेय ने कहा कि विधायक अगर जनता के मुद्दों को सदन तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं, तो उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देकर नया जनादेश लेना चाहिए।
पूर्व विधायक पांडेय ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री रहे अग्रवाल विधानसभा में बिलासपुर के मुद्दों को प्रभावी ढंग से नहीं उठा रहे हैं। पिछले ढाई साल के विधानसभा रिकॉर्ड में उन्होंने एक भी सवाल नहीं पूछा है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी दावा किया कि अग्रवाल मंत्री पद की चाहत में बिलासपुर के विकास से समझौता कर चुके हैं। उन्हें डर है कि विधानसभा में बोलने या सवाल उठाने से सरकार और भाजपा के बड़े नेता नाराज हो सकते हैं, जिससे उन्हें मंत्री पद मिलने में बाधा आएगी। इसी डर के कारण वे विधानसभा में मौन रहते हैं।
कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार और स्थानीय विधायक को शहर की मूलभूत समस्याओं पर घेरते हुए कहा कि लंबे समय तक मंत्री और विधायक रहने के बावजूद बिलासपुर आज भी जलभराव, जर्जर सड़कों, पेयजल संकट, बिजली कटौती, अपराध, नशाखोरी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। शैलेष पांडेय ने अपने विधायक कार्यकाल का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने विधानसभा में 392 प्रश्न उठाकर बिलासपुर के मुद्दों को प्रमुखता से रखा था, जबकि वर्तमान विधायक का रिकॉर्ड जनता के सामने है। उन्होंने सवाल किया कि जब दूसरे विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याएं सदन में उठा रहे हैं, तो बिलासपुर की आवाज आखिर क्यों खामोश है।
स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा। जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने आरोप लगाया कि करीब 1100 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद पहली ही बारिश में शहर जलमग्न हो गया। कई घरों में पानी घुसने से लोगों के जरूरी दस्तावेज और घरेलू सामान खराब हो गए, लेकिन प्रभावित परिवारों को मात्र 6 हजार रुपए की सहायता देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली गई। कांग्रेस ने वास्तविक नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा देने और स्मार्ट सिटी के कार्यों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी ने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था, रेलवे ट्रेनों की निरस्ती, हवाई सेवाओं की कमी, बढ़ी बिजली दरों और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी सरकार पर निशाना साधा।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि बिलासपुर के विकास और जनता के अधिकारों के लिए है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनहित के मुद्दों की अनदेखी जारी रही, तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक अपना आंदोलन और तेज करेगी। प्रेसवार्ता में पूर्व विधायक शैलेष पांडेय के साथ जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी, नेता प्रतिपक्ष भरत कश्यप और उपनेता प्रतिपक्ष रामा बघेल भी मौजूद रहे।

