छत्तीसगढ़ में अतिथि शिक्षकों के 22 दिवसीय आंदोलन पर देर रात पुलिस का ‘एक्शन’: टेंट उखाड़े, शिक्षक हिरासत में
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 22 दिनों से प्रदर्शन कर रहे अतिथि शिक्षकों के आंदोलन पर देर रात पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। पुलिस ने हिंदी भवन के सामने लगे धरनास्थल से टेंट उखाड़कर जब्त कर लिए। सुबह होते ही, धरनास्थल पर पहुंचे करीब 50 अतिथि शिक्षकों को पुलिस ने बसों में बैठाकर हिरासत में ले लिया। पूरे धरनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात है और शहर के बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि कोई नया प्रदर्शनकारी आंदोलन में शामिल न हो सके।
बस्तर और आदिवासी क्षेत्रों में पदस्थ इन अतिथि शिक्षकों का यह धरना पिछले 22 दिनों से जारी था। इससे पहले पुलिस ने दिन में ही शिक्षकों को धरना समाप्त करने की चेतावनी दी थी। चेतावनी के बावजूद शिक्षकों के डटे रहने के बाद, देर रात यह कड़ी कार्रवाई की गई। पुलिस के अधिकारियों ने बुधवार दोपहर में भी शिक्षकों को शाम तक धरना खत्म करने का अल्टीमेटम दिया था, जिसमें कहा गया था कि अगर वे नहीं माने तो अगले दिन से उन्हें वहां बैठने नहीं दिया जाएगा।
अतिथि शिक्षक संघ का कहना है कि उनका आंदोलन संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान कार्य के बदले समान वेतन और मानदेय बढ़ाने जैसी मुख्य मांगों को लेकर है। संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षक कई सालों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। उन्होंने दूर-दराज और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों में भी अपनी सेवाएं दी हैं, लेकिन आज भी उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और न ही उनके भविष्य को लेकर कोई स्थायी नीति बनाई गई है।
इस कार्रवाई से पहले, अतिथि शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के दुर्ग स्थित निवास का करीब 24 घंटे तक घेराव किया था। मंत्री से चर्चा कराने के आश्वासन के बाद शिक्षक वहां से लौटकर हिंदी भवन के सामने फिर धरने पर बैठ गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि बातचीत के बाद उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला होगा, लेकिन उनकी यह उम्मीद पूरी नहीं हो सकी और सरकार के साथ अब तक केवल चर्चा हुई है, किसी भी मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद भी अतिथि शिक्षकों ने साफ कहा है कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। शिक्षकों का कहना है कि वे फिर से धरना देने की कोशिश करेंगे और जब तक उनकी मांगों पर लिखित और ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार सिर्फ आश्वासन दिया जाता है, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता। फिलहाल, सरकार और अतिथि शिक्षक संघ के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन किसी भी मांग पर सहमति न बनने से आंदोलन के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।




