छत्तीसगढ़

लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फायर सेफ्टी सिस्टम की लचर व्यवस्था पर नाराजगी जताई

15 अगस्त विज्ञापन

लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फायर सेफ्टी सिस्टम की लचर व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि केवल टेंडर दिखाने से काम नहीं चलेगा। जमीन पर काम होना चाहिए।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने उन सभी टेंडरों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जो फायर ब्रिगेड के आधुनिक वाहनों और उपकरणों की खरीद के लिए जारी किए गए हैं।

वहीं, जिला प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला इमारतों की जांच के लिए कमेटियां गठित की हैं। शहर स्तर पर बनी कमेटी की अध्यक्षता एसडीएम करेंगे, जबकि हर अनुविभाग में एसडीएम की अगुवाई में अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं।

इन कमेटियों को 10 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल, साल 2020 में फायर स्टेशन निर्माण की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन ढाई साल बाद भी जिला प्रशासन उपयुक्त जमीन की पहचान नहीं कर सका।हाल ही में मोपका स्थित विद्युत वितरण कंपनी के सब स्टेशन और दुकानों में आग लगने की घटना के बाद यह मामला फिर से चर्चा में आया। मीडिया में खबरें आने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की। कोर्ट ने राज्य शासन से शपथपत्र के साथ जवाब भी मांगा है।

72.70 करोड़ के फायर उपकरणों की होगी खरीदी

इस मामले में राज्य शासन की तरफ से जवाब में बताया गया कि राज्य में 72.70 करोड़ के फायर उपकरणों की खरीदी प्रक्रिया जारी है। 16 जगहों पर नए फायर स्टेशन बनाने की योजना है। इसके लिए कई जिलों में अब तक जमीन नहीं मिल पाई है। उपकरणों की खरीदी के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है।

हाईकोर्ट बोला- केवल टेंडर नहीं, जमीन पर दिखना चाहिए काम

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान फायर सेफ्टी व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि केवल टेंडर दिखाने से काम नहीं चलेगा। जमीन पर काम होना चाहिए। वर्क आर्डर भी दिखना जरूरी है।

डिवीजन बेंच ने फायर ब्रिगेड वाहनों और उपकरणों की खरीदी पर शासन को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी।

11 जिलों में जमीन आवंटन की प्रक्रिया नहीं हो पाई शुरू

गरियाबंद, बेमेतरा, बालोद, सक्ती और सूरजपुर में जमीन मिल चुकी है और निर्माण के लिए फंड भी जारी कर दिया गया है। मुंगेली, जीपीएम, बीजापुर, सारंगढ़, सुकमा, नारायणपुर समेत 11 जिलों में अभी भी जमीन का आवंटन होना बाकी है।

प्रशासन ने भी बनाई जांच कमेटियां

लखनऊ अग्निकांड के चौथे दिन जिला प्रशासन ने सभी कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला भवनों की जांच के लिए कमेटियां बनाई है। शहर में जांच के लिए बनाई गई कमेटी के अध्यक्ष एसडीएम बनाए गए हैं। वहीं, हर अनुविभाग में एसडीएम की अगुवाई में कमेटी बनाई गई है।

6 संस्थानों की जांच में मिली खामियां

नगर निगम ने 6 कोचिंग संस्थानों में जांच की थी। एंट्री-एक्जिट के लिए एक ही गेट होने के कारण उड़ान कोचिंग को सील किया था। वहीं, पांच कोचिंग संस्थानों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।

इधर, गुरुवार को प्रशासन ने बड़ा फैसाल लिया। प्रशासन ने जिले के सभी कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला भवनों की व्यापक सुरक्षा जांच के आदेश दिए है। इसके लिए कमेटियां बनाई है।

राजस्व, पुलिस अफसर और निगम की टीम करेगी जांच

जिला स्तरीय कमेटी में बिलासपुर एसडीएम मनीष साहू को अध्यक्ष बनाया गया, जबकि निगम के अपर आयुक्त, कोतवाली-सिविल लाइन सीएसपी, जिला सेनानी और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के संयुक्त संचालक को सदस्य बनाया गया है।

हर अनुविभाग में एसडीएम की अध्यक्षता में जांच दल बनाए गए हैं, जिनमें एसडीओपी, सीएमओ, थाना प्रभारी और लोक निर्माण विभाग के अनुविभागीय अधिकारी सदस्य होंगे।

कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा मानकों में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी कोचिंग संस्थान या व्यावसायिक भवन में गंभीर अनियमितता मिलती है तो पहले उसे सुधारने कहा गया जाएगा और नहीं मानने पर कार्रवाई होगी।

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