Uncategorized

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बालिग और शादीशुदा महिला की सहमति से बना शारीरिक संबंध दुष्कर्म नहीं, याचिका खारिज

15 अगस्त विज्ञापन


ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ पीड़िता की अपील पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी से बनाए शारीरिक संबंध …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 29 Mar 2026 08:32:07 PM (IST)Updated Date: Sun, 29 Mar 2026 08:32:07 PM (IST)

सहमति से संबंध पर HC की अहम टिप्पणी।

HighLights

  1. सहमति से संबंध पर HC की अहम टिप्पणी
  2. ट्रायल कोर्ट के फैसले को रखा बरकरार
  3. हाई कोर्ट ने पीड़िता की अपील ठुकराई

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। दुष्कर्म के मामले में हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ पीड़िता की अपील पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी से बनाए शारीरिक संबंध को दुष्कर्म नहीं माना जाएगा।

ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है। छत्तीसगढ़ बेमेतरा जिले की निवासी दुष्कर्म पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

शादी का झांसा और शारीरिक संबंध का आरोप

याचिका में बताया कि वह कृषि महाविद्यालय में मजदूरी करने जाती थी। गांव के दूसरे लोग भी काम करने आते थे। आरोपित भी वहां काम करता था। 19 जून 2022 को आरोपित ने उससे बात करना शुरू किया और कहा कि वह उससे शादी करेगा। इसके बाद उसने शारीरिक संबंध बनाने के लिए कहा।

25 जुलाई 2022 की सुबह चार बजे जब पीड़िता शौच के लिए जा रही थी तो आरोपित उससे मिला और अपने साथ घर ले गया और दुष्कर्म किया। जब आरोपित ने संबंध बनाया तो वह पहले से ही तीन माह के गर्भ से थी। लोक लाज के भय से उसने इस बारे में किसी को जानकारी नहीं दी। पति के पूछने पर घटना की जानकारी दी, इसके बाद थाने में रिपोर्ट लिखाई।

यह भी पढ़ें- क्राइम ब्रांच अफसर बन शिक्षिका को डराया, अश्लील फोटो के नाम पर ₹4.50 लाख की ठगी, सरगुजा पुलिस ने दर्ज की FIR

ट्रायल कोर्ट का फैसला और हाई कोर्ट की टिप्पणी

पुलिस ने आरोपित के खिलाफ जुर्म दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया। ट्रायल कोर्ट ने गवाहों एवं मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपित को दोषमुक्त कर दिया। इस पर पीड़िता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस प्रकरण में ऐसा कोई सबूत नहीं है कि पीड़िता की उम्र 18 साल से कम थी।

याचिकाकर्ता के बयानों से साफ है कि आरोपी ने पीड़िता की सहमति से शारीरिक संबंध बनाया था। कोर्ट ने कहा, एक बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी मर्जी और सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध में दुष्कर्म का मामला नहीं बनता है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।



Source link

15 अगस्त विज्ञापन
विज्ञापन 1
विज्ञापन 2
विज्ञापन 3
विज्ञापन 4
विज्ञापन 5
विज्ञापन 6
विज्ञापन 7
विज्ञापन 8

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!