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रायगढ़: कोड़ासिया कन्या छात्रावास में बेटियों से कराया गया भवन की रंगाई‑पुताई, वीडियो वायरल होने पर शुरू हुई जांच

Raigarh: Girls at the Kodasiya Girls Hostel were made to paint and whitewash the building; an investigation was launched after the video went viral.

15 अगस्त विज्ञापन

गौरीशंकर गुप्ता/रायगढ़:रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के ग्राम कोड़ासिया स्थित प्री‑मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास पर एक वीडियो के वायरल होने के बाद जिला प्रशासन और आदिवासी विकास विभाग में हड़कंप मच गया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि छात्रावास की नाबालिग छात्राओं से भवन की दीवारों की रंगाई‑पुताई, रंग घोलना और कमरों की सफाई जैसा शारीरिक काम कराया जा रहा है, जिसने “शिक्षा के नाम पर श्रमिक बनाई गईं बेटियां” जैसी चर्चा शुरू कर दी है।

स्थानीय स्रोतों के अनुसार, इस छात्रावास में 40–45 नाबालिग छात्राएं निवास करते हुए पढ़ाई करती हैं। वायरल वीडियो में कुछ लड़कियां रंग की बाल्टी हाथ में लिए दीवारों पर रोलर चलाते दिख रही हैं, तो कुछ चूना या रंग घोल रही हैं और कई सफाई के काम में लगी हुई हैं। स्थिति इतनी चर्चित हुई कि वीडियो व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल गया और स्थानीय स्तर पर आक्रोश उठ खड़ा हुआ।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए रायगढ़ कलेक्टर कार्यालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। कलेक्टर कार्यालय के आदेशानुसार समिति में धर्मेंद्र सिंह बैस, क्षेत्र संयोजक, कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास रायगढ़ धनेश्वरी सिदार, तथा नोडल अधीक्षक आदिवासी विकास विभाग लैलूंगा उमेश पटेल को शामिल किया गया है। जांच दल को 28 फरवरी को छात्रावास पहुंचकर स्थल निरीक्षण कर विस्तृत प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया गया है।

डिप्टी कलेक्टर अपूर्वा टोप्पो ने बताया कि मामला हाल ही में संज्ञान में आने के बाद संबंधित एसडीएम से रिपोर्ट तलब की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में प्रबंधन या कर्मचारियों के खिलाफ नियमों का उल्लंघन या नाबालिगों से अनुचित श्रम कराने का प्रमाण मिलता है, तो उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रशासन ने माना कि बालश्रम और नाबालिगों की सुरक्षा का मुद्दा अत्यंत गंभीर है और इससे किसी भी तरह की अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस घटना ने राज्य सरकार की ओर से आदिवासी बेटियों के लिए चलाई जा रही छात्रावास योजनाओं की व्यवस्थागत व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग और आदिवासी विकास विभाग दावा करते हैं कि बेटियों को “सुरक्षित पर्यावरण में निःशुल्क शिक्षा और सुविधाएं” देने के लिए करोड़ों की योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन कोड़ासिया की तस्वीर बताती है कि कई छात्रावासों में छात्राओं को बस श्रमिक की तरह इस्तेमाल किया जा रहा हो सकता है।

स्थानीय स्तर पर लोगों की मांग है कि न केवल इस वीडियो की जांच हो, बल्कि रायगढ़ जिले के सभी आदिवासी कन्या छात्रावासों में आवधिक निरीक्षण, आंतरिक मॉनिटरिंग और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में बच्चियों से किसी भी तरह की गैर‑शैक्षणिक शारीरिक कार्य कराने की घटना रोकी जा सके।

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